Liquor News: पूरी दुनिया में घटेगी शराब की बिक्री, लेकिन भारत में क्यों बढ़ रहा है दारु का बाजार?

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Liquor News: एक समय था जब शराब कंपनियां अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे बड़े बाजारों पर सबसे ज्यादा निर्भर रहती थीं. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. दुनिया के कई बड़े देशों में शराब की खपत घटने की आशंका जताई जा रही है, जबकि भारत शराब उद्योग के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आ रहा है. मार्केट रिसर्च फर्म IWSR की रिपोर्ट के मुताबिक अगले 10 सालों में वैश्विक शराब खपत में गिरावट देखने को मिल सकती है. इसके बावजूद भारत में मांग लगातार बढ़ने की उम्मीद है.

क्यों गिर रहा है शराब का बाजार?

शराब उद्योग के सामने कई नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. बढ़ती महंगाई के कारण लोगों के पास खर्च करने के लिए कम पैसा बच रहा है. इसके अलावा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी तेजी से बढ़ी है, जिसके चलते कई लोग शराब का सेवन कम कर रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी और चीन जैसे देशों में युवा पीढ़ी पहले की तुलना में कम शराब पी रही है. यही वजह है कि आने वाले सालों में इन बाजारों में मांग कमजोर रहने की संभावना है.

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भारत में क्यों बढ़ी शराब की मांग?

भारत की कहानी पूरी तरह अलग है. यहां की युवा आबादी, बढ़ती आय और तेजी से हो रहा शहरीकरण शराब बाजार को मजबूती दे रहे हैं. जैसे-जैसे लोगों की कमाई बढ़ रही है, वो सस्ते उत्पाद की जगह प्रीमियम और ब्रांडेड शराब खरीद रहे हैं. IWSR के आंकड़ों के अनुसार भारत में कुल बेवरेज अल्कोहल की बिक्री पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ी है और आने वाले समय में ये और ज्यादा बढ़ सकती है.

शराब कंपनियों की नजर भारत पर

वैश्विक मांग कमजोर पड़ने के बीच बड़ी शराब कंपनियां भारत को अपने सबसे अहम ग्रोथ मार्केट के रूप में देख रही हैं. यही कारण है कि कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय बाजार में निवेश बढ़ा रही हैं और प्रीमियम उत्पादों पर फोकस कर रही हैं. एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि 2032 तक भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शराब बाजार बन सकता है. यह बदलाव वैश्विक शराब उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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क्या चुनौतियां भी हैं?

भारत में शराब का बाजार बढ़ रहा है, लेकिन उद्योग के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं. अलग-अलग राज्यों के अलग नियम, ऊंचे टैक्स, लाइसेंसिंग व्यवस्था और कई तरह के नियम कंपनियों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है. इसके अलावा कुछ राज्यों में शराबबंदी और सख्त नियंत्रण नीतियां भी कारोबार को प्रभावित करती हैं.



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