- चार्टर्ड अकाउंटेंट बनकर पिता के संघर्ष को खत्म करना चाहती है.
मध्य प्रदेश बोर्ड की तरफ से कल 10वीं और 12वीं क्लास के नतीजे जारी किए गए. इस बार भी राज्य का रिजल्ट शानदार रहा और बेटियों ने फिर से अपना दम दिखाया. वहीं, इसी बीच एक ऐसी कहानी भी सामने आई है, जो आपकी आंखों में पानी ला देगी. ये कहानी है 12वीं क्लास की छात्रा चांदनी विश्वकर्मा की. आइए जानते हैं…
भोपाल की भीम नगर झुग्गी बस्ती की तंग गलियों में रहने वाली सिर्फ 18 साल की चांदनी विश्वकर्मा ने मध्य प्रदेश बोर्ड की कक्षा 12वीं की परीक्षा में ऐसा कमाल कर दिखाया है कि पूरा प्रदेश उनका नाम गर्व से ले रहा है. 98.8 प्रतिशत अंक हासिल कर चांदनी ने न सिर्फ अपने परिवार का, बल्कि पूरे इलाके का सिर ऊंचा कर दिया है.
मुश्किल हालात के बीच बड़ी कामयाबी
चांदनी विश्वकर्मा ने कॉमर्स स्ट्रीम में 500 में से 494 अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान पाया. यह उपलब्धि इसलिए और खास हो जाती है क्योंकि उन्होंने करीबन 7 लाख स्टूडेंट्स को पीछे छोड़ते हुए यह मुकाम हासिल किया. जिन छात्रों के पास अच्छी स्कूल, कोचिंग और पढ़ाई की सारी सुविधाएं थीं, उनके बीच चांदनी ने अपनी जगह मेहनत के दम पर बनाई.
झुग्गी का जीवन और परिवार की हालत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चांदनी का परिवार बहुत साधारण है. उसके पिता रामभुवन दिहाड़ी पर बढ़ई का काम करते हैं. रोज काम मिले तो घर में चूल्हा जलता है, नहीं मिले तो मुश्किलें और बढ़ जाती हैं. झुग्गी में रहने का मतलब है हर दिन नई चुनौती. कभी पानी की परेशानी, कभी रोशनी की कमी, तो कभी शोर-शराबा.
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लेकिन इन सबके बीच चांदनी ने कभी पढ़ाई से समझौता नहीं किया. जब घर में पढ़ने की जगह नहीं मिलती थी, तो वह सड़क किनारे बैठकर पढ़ती थी. कई बार उसने स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर किताबें खोलीं. मच्छरों के बीच, कम रोशनी में, फुटपाथ पर बैठकर उसने अपने सपनों को मजबूत किया.
मुफ्त स्कूल बना सहारा
चांदनी ने गुरुदेव गुप्ता शिक्षा केंद्र में पढ़ाई की. यह एक ऐसा स्कूल है जिसे एक सामाजिक संस्था चलाती है और जहां गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है. अगर यह स्कूल न होता, तो शायद चांदनी की पढ़ाई आगे बढ़ पाना मुश्किल हो जाता.
रोज 8-9 घंटे पढ़ाई
चांदनी हर दिन 8 से 9 घंटे पढ़ाई करती थी. उसने अपने हर पल का सही उपयोग किया. उसके पिता की मेहनत और संघर्ष उसे रोज प्रेरणा देते थे. वह जानती थी कि शिक्षा ही वह रास्ता है जो उसके परिवार की हालत बदल सकता है.
चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का सपना
चांदनी अब चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनना चाहती है. वह अच्छी नौकरी करके अपने परिवार को बेहतर जीवन देना चाहती है. उसका कहना है कि वह चाहती है कि उसके माता-पिता को अब संघर्ष न करना पड़े और वे सम्मान के साथ जीवन जी सकें.
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