Sudden hearing loss Causes : अचानक एक कान से सुनाई देना पड़ गया बंद, तुरंत कराएं इलाज नहीं तो हो जाएगा परमानेंट बहरापन

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Sudden hearing loss Causes : हम अक्सर कान में हल्का भारीपन या कम सुनाई देने जैसी समस्याओं को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. कई लोग सोचते हैं कि कान में मैल जम गया होगा या सर्दी-जुकाम की वजह से ऐसा हो रहा होगा और कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाएगा, लेकिन अगर अचानक एक कान से सुनाई देना कम हो जाए या पूरी तरह बंद हो जाए, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए.

विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार यह समस्या नॉर्मल कारणों से होती है, लेकिन कुछ मामलों में यह एसएसएचएल (Sudden Sensorineural Hearing Loss) का संकेत हो सकती है. यह एक मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है. अगर इसका इलाज समय रहते शुरू न किया जाए, तो सुनने की क्षमता हमेशा के लिए प्रभावित हो सकती है. लेकिन समय पर पहचान और सही इलाज से कई मरीजों की सुनने की क्षमता दोबारा वापस आ सकती है. इसलिए जरूरी है कि इसके कारणों, लक्षणों और इलाज के बारे में सही जानकारी हो. 

अचानक एक कान से कम सुनाई देने के क्या हो सकते हैं कारण?

1. कान में मैल जम जाना – कई बार कान में जरूरत से ज्यादा वैक्स जमा हो जाता है, जिससे आवाजा का रास्ता बंद हो जाता है और सुनने में परेशानी होने लगती है. इसके लक्षण कान में भारीपन महसूस होना, खुजली होना,आवाज का दबा-दबा सुनाई देना हो सकते हैं.ऐसी स्थिति में डॉक्टर ड्रॉप्स या सुरक्षित तरीके से मैल निकाल देते हैं और सुनने की क्षमता सामान्य हो सकती है. 

2. कान में संक्रमण या तरल पदार्थ जमा होना – सर्दी, फ्लू, एलर्जी या गले के संक्रमण के बाद कान के पर्दे के पीछे तरल पदार्थ जमा हो सकता है. इससे आवाज का कंपन ठीक तरह से अंदर नहीं पहुंच पाता है. इसके लक्षण कान में दर्द, बुखार, कान बंद होने जैसा एहसास, सुनाई कम देना है. वायरल संक्रमण अक्सर कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, जबकि बैक्टीरियल संक्रमण में एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ सकती है. 

3.  यूस्टेशियन ट्यूब में रुकावट – यह ट्यूब कान के अंदर और गले के बीच दबाव को संतुलित करने का काम करती है. एलर्जी, साइनस या जुकाम की वजह से इसमें सूजन आ सकती है. 

4. बैरोट्रॉमा यानी दबाव की वजह से चोट – हवाई यात्रा, पहाड़ों की यात्रा या स्कूबा डाइविंग के दौरान वातावरण का दबाव तेजी से बदलता है. इससे कान में पॉप जैसी आवाज आ सकती है और सुनाई देना प्रभावित हो सकता है. इस स्थिति में अक्सर बार-बार निगलना, जम्हाई लेना, च्युइंग गम चबाना मददगार हो सकता है, 

5. तेज आवाज का असर – लंबे समय तक तेज संगीत, मशीनों या पटाखों जैसी तेज आवाजों के संपर्क में रहने से कान के अंदर मौजूद सेंसिटिव सेल्स पर असर पड़ सकता है. 

6. एसएसएचएल  – यह सबसे खतरनाक स्थिति है, जिसमें कुछ घंटों या अधिकतम तीन दिनों के अंदर अचानक सुनने की क्षमता कम हो जाती है. कई बार मरीज सुबह उठता है और उसे एक कान से आवाज बहुत कम सुनाई देती है. इसके साथ कान में बजने की आवाज, चक्कर आना, संतुलन बिगड़ना, कान में पॉप या क्लिक महसूस होना, बिना दर्द के सुनाई देना कम हो जाना जैसे लक्षण भी हो सकते हैं. डॉक्टरों के अनुसार, यह मेडिकल इमरजेंसी है और इसका इलाज 72 घंटे के अंदर शुरू हो जाना चाहिए. 

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कैसे होता है इसका इलाज?

1. अगर कान में वैक्स जमा होने की वजह से सुनाई कम दे रहा है, तो डॉक्टर वैक्स को नरम करने वाली ड्रॉप्स देते हैं. इसके बाद सुरक्षित तरीके से सफाई या माइक्रोसक्शन तकनीक से मैल निकालकर सुनने की क्षमता होती है. 

2. कान में संक्रमण होने पर दर्द और बुखार कम करने की दवाएं दी जाती हैं. अगर संक्रमण बैक्टीरिया की वजह से हो या लंबे समय तक बना रहे, तो एंटीबायोटिक और डॉक्टर की निगरानी जरूरी होती है. 

3. सर्दी, एलर्जी या साइनस के कारण कान का दबाव बिगड़ने पर नाक के स्टेरॉयड स्प्रे और डिकंजेस्टेंट दवाएं दी जा सकती हैं. वाल्साल्वा तकनीक की मदद से कान के अंदर का दबाव संतुलित करने की कोशिश की जाती है. 

4, तेज आवाज के कारण सुनाई देने में दिक्कत होने पर कुछ दिनों तक शोर से दूर रहने और आराम की सलाह दी जाती है. नुकसान से बचने के लिए ईयरप्लग का इस्तेमाल और टिनिटस होने पर साउंड थेरेपी मददगार हो सकती है. 

5. एसएसएचएल में डॉक्टर तुरंत स्टेरॉयड थेरेपी शुरू कर सकते हैं. स्टेरॉयड गोलियों या कान के अंदर इंजेक्शन के रूप में दिए जाते हैं जिससे सुनने की क्षमता वापस आने की संभावना बढ़ सके. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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