Pressure Cooker Guide : दाल को प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स माना जाता है और लगभग हर घर में रोज किसी न किसी तरह की दाल बनती ही है, लेकिन अक्सर लोगों की एक कंफ्यूजन रहती है कि प्रेशर कुकर में दाल बनाते समय कितनी सीटी लगानी चाहिए. कभी दाल कच्ची रह जाती है, तो कभी इतनी ज्यादा गल जाती है कि उसका टेस्ट और बनावट दोनों खराब हो जाते हैं. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि कुकर में एकदम परफेक्ट दाल कितनी सीटी में पकती है.
कुकर में एकदम परफेक्ट दाल कितनी सीटी में पकती है?
हर दाल का पकने का समय अलग होता है. यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि दाल को पहले भिगोया गया है या नहीं, कुकर का साइज क्या है और गैस की आंच कितनी रखी गई है. अगर सही तरीके से दाल पकाई जाए तो उसका टेस्ट भी बढ़ जाता है और उसमें मौजूद पोषक तत्व भी काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं. इसलिए हर दाल के अनुसार सही तरीके से पकाना जरूरी है.
अरहर दाल में कितनी सीटी लगती है?
अरहर की दाल भारतीय रसोई की सबसे फेमस दालों में से एक है. इसे पकाने से पहले 15 से 20 मिनट तक पानी में भिगो देने से यह जल्दी और अच्छी तरह गल जाती है. अगर दाल भिगोई हुई है, तो इसे पकाने के लिए 2 से 3 सीटी काफी होती हैं. बेहतर टेस्ट और सही बनावट के लिए पहली सीटी तेज आंच पर आने दें और उसके बाद गैस धीमी करके 1 से 2 सीटी और लगाएं. इससे दाल अंदर तक अच्छी तरह पकती है और उसका टेस्ट भी बढ़ जाता है.
मूंग दाल को पकाने का सही तरीका
मूंग दाल सबसे जल्दी पकने वाली दाल मानी जाती है, इसलिए इसे ज्यादा देर तक प्रेशर में पकाने की जरूरत नहीं होती है. ज्यादा सीटी लगने पर यह बहुत ज्यादा गलकर पेस्ट जैसी हो सकती है. मूंग दाल को पकाने के लिए 1 से 2 सीटी पूरी होती हैं. दूसरी सीटी आते ही गैस बंद कर दें और कुकर का प्रेशर अपने आप निकलने दें, इससे दाल की बनावट और टेस्ट दोनों बेहतर बने रहते हैं.
मसूर दाल में कितनी सीटी लगानी चाहिए?
मसूर दाल भी जल्दी पक जाती है और इसे पकाने के लिए बहुत ज्यादा समय नहीं लगता है. आमतौर पर 2 सीटी में यह अच्छी तरह तैयार हो जाती है. अगर आपको थोड़ी गाढ़ी और अच्छी तरह घुली हुई दाल पसंद है, तो गैस बंद करने के बाद कुछ मिनट तक कुकर को बंद ही रहने दें. इससे अंदर की भाप दाल को और मुलायम बना देती है.
चना दाल पकाने का सही तरीका
चना दाल थोड़ी सख्त होती है और इसे पकने में अन्य दालों की तुलना में ज्यादा समय लगता है. इसे बनाने से पहले कम से कम एक घंटे तक पानी में भिगोना चाहिए, जिससे यह आसानी से गल सके. भिगोने के बाद मध्यम आंच पर 4 से 5 सीटी लगाना सही होता है. पकाते समय इसमें थोड़ा तेल डाल देने से झाग कम बनता है और कुकर की सीटी से पानी बाहर निकलने की समस्या भी नहीं होती है.
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उड़द दाल और राजमा में कितनी सीटी लगती है?
उड़द दाल और राजमा जैसी भारी दालों को अच्छी तरह पकाने के लिए ज्यादा प्रेशर और समय की जरूरत होती है. इन्हें रातभर पानी में भिगोना सबसे अच्छा माना जाता है. इसके बाद इन्हें पकाने के लिए 6 से 7 सीटी लगानी चाहिए. वहीं बेहतर परिणाम के लिए शुरुआती 2 सीटी तेज आंच पर आने दें और फिर गैस को धीमा करके करीब 15 मिनट तक पकाएं. इस तरीके से दाल या राजमा पूरी तरह गल जाते हैं.
दाल पकाने से पहले भिगोना क्यों जरूरी है?
दाल को पकाने से पहले कुछ समय के लिए पानी में भिगोना एक आसान लेकिन बेहद फायदेमंद तरीका माना जाता है. इससे दाल की बाहरी परत नरम हो जाती है और वह पानी को अच्छी तरह सोख लेती है, जिससे उसे पकने में कम समय लगता है. भिगोई हुई दाल जल्दी गल जाती है. ऐसी दाल को पकाने में 30 से 50 प्रतिशत तक कम सीटी लग सकती हैं. इसके अलावा, भिगोने से दाल पचने में भी आसान हो जाती है और पेट पर ज्यादा भारी नहीं पड़ती है.
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