जर्मनी से करनी है पत्रकारिता? इन कॉर्सेज में लेना होगा एडमिशन, मिलेगी स्कॉलरशिप

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Journalism Study in Germany: हर साल लाखों भारतीय विदेश में पढ़ाई का सपना देखते हैं. इन्हीं स्टूडेंट में कई का सपना विदेश में जाकर पत्रकारिता की पढ़ाई करना भी होता है. वहीं विदेश में पत्रकारिता की पढ़ाई करने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए जर्मनी भी अच्छा ऑप्शन बनकर सामने आया है. वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी, कम पढ़ाई का खर्च, स्कॉलरशिप और मजबूत मीडिया इंडस्ट्री के कारण हर साल बड़ी संख्या में छात्र जर्मनी का रुख कर रहे हैं.

खास बात यह है कि कई सरकारी यूनिवर्सिटीज में बैचलर स्तर के जर्नलिज्म और मीडिया कोर्स के लिए ट्यूशन फीस नहीं ली जाती है. हालांकि छात्रों को रहने, खाने और दूसरे खर्चों का इंतजाम खुद करना होता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर जर्मनी से पत्रकारिता करनी है, तो किन कोर्सेज में एडमिशन लेना होगा और स्कॉलरशिप कैसे मिलेगी. 

कौन-कौन से कोर्स कर सकते हैं 

जर्मनी में पत्रकारिता और मीडिया से जुड़े कई बैचलर प्रोग्राम उपलब्ध है. इनमें सबसे प्रमुख रूप से बैचलर इन जर्नलिज्म और बैचलर इन मीडिया शामिल है. इन कोर्स के दौरान छात्रों को जर्मनी में रिपोर्टिंग, न्यूज राइटिंग, जर्नलिज्म एथिक्स, मीडिया थ्योरी, एडिटिंग और अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है. वहीं मीडिया कोर्स में एडवर्टाइजमेंट, मार्केटिंग, डिजिटल मीडिया, वीडियो प्रोडक्शन और कम्युनिकेशन जैसे विषयों पर भी फोकस किया जाता है. कोर्स पूरा करने के बाद छात्र रिपोर्टर, एडिटर, प्रोड्यूसर, न्यूज एंकर, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और मीडिया मैनेजर जैसी भूमिका में करियर बना सकते हैं. इसके अलावा जर्मनी में बैचलर इन जर्नलिज्म और मीडिया कोर्स की अवधि आमतौर पर 3 से 5 साल की होती है. ज्यादातर सरकारी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जर्मन भाषा में कराई जाती है, जबकि कुछ प्राइवेट इंस्टीट्यूट में अंग्रेजी मीडियम के कोर्स भी उपलब्ध है. 

एडमिशन के लिए कौन सी योग्यताएं जरूरी?

जर्मनी में बैचलर कोर्स में एडमिशन के लिए छात्रों का दसवीं, बारहवीं पास होना जरूरी है. कई यूनिवर्सिटी 12 से 13 साल की स्कूली शिक्षा या तैयारी कार्यक्रम को भी मान्यता देती है. ज्यादातर इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए कम से कम 50 प्रतिशत अंक जरूरी माने जाते हैं, जबकि प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में अच्छे एकेडमिक रिकॉर्ड की आवश्यकता हो सकती है. इसके अलावा स्टूडेंट को स्टेटमेंट ऑफ परपज, पासपोर्ट, स्टूडेंट विजा, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और जरूरत पड़ने पर कैरक्टर सर्टिफिकेट या लेटर ऑफ रिकमेंडेशन भी जमा करना होता है.

एडमिशन के लिए कौन-कौन से एग्जाम देने होते हैं?

अगर कोर्स अंग्रेजी भाषा में है, तो IELTS या TOEFL स्कोर देना होता है. वहीं जर्मनी भाषा में पढ़ाई वाले कोर्स के लिए TestDaF या DSH परीक्षा पास करनी होती है. कुछ यूनिवर्सिटी अंडरग्रेजुएट ऐडमिशन के लिए टेस्ट TestAS मांगती है. इसके अलावा कुछ स्पेशल कोर्स के लिए GRE, GMAT, dMAT  की जरूरत पड़ सकती है. टेक्निकल बैचलर प्रोग्राम के लिए कुछ यूनिवर्सिटी भारतीय छात्रों को JEE Advanced स्कोर के आधार पर भी एडमिशन का मौका देती है. 

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जर्मनी में कितना आता है पढ़ाई का खर्च?

जर्मनी की ज्यादातर पब्लिक यूनिवर्सिटीज में पत्रकारिता की पढ़ाई पर ट्यूशन फीस नहीं ली जाती है, जबकि कुछ प्राइवेट यूनिवर्सिटी फीस लेती है. वहीं यहां  रहने का खर्च औसतन 700 से 1000 यूरो प्रति माह तक हो सकता है. कुछ इंस्टीट्यूट में सेमेस्टर योगदान या दूसरे शुल्क अलग से देने पड़ सकते हैं. इसके अलावा प्राइवेट यूनिवर्सिटी में फीस लगभग 6500 यूरो प्रति सेमेस्टर तक हो सकती है.

स्कॉलरशिप का भी मिलता है लाभ 

जर्मनी में पढ़ाई करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए कई स्कॉलरशिप योजनाएं उपलब्ध है. इनमें DAAD Scholarship, Heinrich Boll Scholarship, Friedrich Ebert Scholarship, Erasmus Scholarship और Deutschland Stipendium National Scholarship जैसी योजनाएं प्रमुख है. इन स्कॉलरशिप के जरिए छात्रों को ट्यूशन फीस, मासिक स्टाइपेंड और दूसरी आर्थिक सहायता भी दी जाती है.

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