‘अब मैं सिर्फ भारत के लिए नहीं खेलना चाहता, बल्कि…’, पहले वनडे में डेब्यू करने वाले गुरनूर बरार का बड़ा बयान

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गुरनूर बरार का भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने का सपना पूरा हो चुका है. उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ पहले वनडे में डेब्यू किया और अपने पहले ही ओवर में विकेट भी हासिल किया. 6 फीट 5 इंच इस लम्बे गेंदबाज ने पहले मैच में खूब प्रभावित किया है. उन्होंने स्टार स्पोर्ट्स पर बात करते हुए बताया कि शुभमन गिल का उन्हें सपोर्ट मिला, जो IPL में भी उनके कप्तान थे. बरार ने अपने आगे के प्लान के बारे में भी बताया.

गुरनूर बरार ने बताया, “मेरे पिता भी नेशनल बास्केटबॉल प्लेयर रह चुके हैं, अब पुलिस में हैं और वह चाहते थे कि मैं स्पोर्ट्स में जाऊं. मैं 16 साल का था जब मैंने डिस्ट्रिक्ट का पहला मैच खेला था, वो भी शुभमन गिल की कप्तानी में.” उन्होंने बताया कि डोमेस्टिक में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उन्हें भरोसा हुआ कि वह भी अपने दम पर मैच का रुख पलट सकते हैं. उन्होंने उस समय के बारे में भी बताया जब वह गुजरात टाइटंस के लिए पहली बार नेट गेंदबाज के तौर पर आए थे.

उन्होंने कहा, “जब मैं पहले साल GT के नेट गेंदबाज के रूप में आया तो नेहरा सर (आशीष नेहरा, हेड कोच और गुजरात टाइटंस) ने मुझे देखा और वह बहुत प्रभावित हुए. मेरी लंबाई और गेंदबाजी से वह इम्प्रेस हुए, जब मैं इस टीम में आया तो उसके बाद से मेरा ग्रोथ हुआ. नेहरा सर के साथ शुभमन गिल की भी सपोर्ट रहा है.” उन्होंने बताया कि गिल, नेहरा मुझे बहुत पुश करते हैं और ये मेरे लिए मददगार रहा है.

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टेस्ट क्रिकेट खेलना है सपना

गुरनूर बरार ने कहा, “मेरा एक ही सपना था कि इंडिया को टेस्ट में रिप्रेजेंट करना, तो वो ड्रीम ऐसे ही नहीं होता. जैसे सब सोचते हैं कि IPL, वनडे, टी20 भी खेलना है, लेकिन एक अल्टीमेट गोल होता है वो एक टेस्ट क्रिकेट है. उसके ऊपर कुछ नहीं है.” उन्होंने आगे कहा, “जब मैं सो रहा था तब मेरे दोस्त ने जगाकर मुझे मेरे सिलेक्शन के बारे में बताया, फिर मुझे पता चला कि वनडे टीम में भी चुना गया हूं तो वो फीलिंग ही अलग थी.”

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उन्होंने डेल स्टेन को अपना फेवरेट गेंदबाज बताते हुए कहा कि उनका अग्रेशन मुझे बहुत पसंद था, उनका हर विकेट पर सेलिब्रेशन करने का तरीका उन्हें पसंद था.

उन्होंने कहा, “मेरा माइंडसेट पहले भी वही था और अभी भी यही है कि सिर्फ खेलना नहीं है, बल्कि अच्छा खेलना है और वहां पर बने रहना है. तो वही माइंडसेट मेरा रहेगा, चाहे मैं पहला मैच खेलूं या 100वां मैच खेल रहा होऊंगा.”



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