सौरव गांगुली और अभिषेक डालमिया के बीच मनमुटाव खुलकर सामने आया? कैब ने भ्रष्टाचार के आरोपों का कड़ा जवाब दिया

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बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) के पूर्व अध्यक्ष अभिषेक डालमिया और सौरव गांगुली के नेतृत्व वाले मौजूदा प्रशासन के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव बुधवार को खुलकर सामने आ गया. राज्य की क्रिकेट संस्था के शीर्ष अधिकारियों ने अपनी सालाना आम बैठक (एजीएम) से ठीक तीन महीने पहले भ्रष्टाचार और कामकाज में खामियों के आरोपों को सिरे से खारिज किया.

पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री डॉ. इंद्रनील खान को लिखे तीन पन्नों के पत्र में कैब ने भ्रष्टाचार, पारदर्शिता की कमी और ‘व्यवस्था में गड़बड़ी’ के बारे में जताई गई ‘सामान्य आशंकाओं’ को खारिज कर दिया. अभिषेक ने गड़बड़ी की शिकायतों की जांच के लिए राज्य सरकार की ‘स्पोर्ट्स इंटीग्रिटी एंड एंटी-करप्शन हेल्पलाइन’ से संपर्क किया था, जिसके चार दिन बाद यह पत्र लिखा गया.

गांगुली, सचिव बबलू कोले और अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर वाले कैब के पत्र में संस्था के कामकाज के तरीके का बचाव किया गया, और मौजूदा संस्थागत तरीकों को अपनाने के बजाय मामले को सार्वजनिक करने के अभिषेक के फैसले पर सवाल उठाए गए.

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पत्र में गांगुली के प्रशासनिक और क्रिकेट से जुड़े अनुभवों का भी जिक्र किया गया. इसमें बताया गया कि उन्होंने भारत के कप्तान, कैब अध्यक्ष, भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष और आईसीसी क्रिकेट समिति के अध्यक्ष के तौर पर काम किया है, और फिर भी ’उनकी ईमानदारी पर कभी कोई आरोप नहीं लगा.’

कैब ने तर्क दिया कि अभिषेक को सचिव और अध्यक्ष के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान इस प्रक्रिया की पूरी जानकारी थी, फिर भी उन्होंने इसे ‘नजरअंदाज’ किया.

यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि यह सितंबर में होने वाली एजीएम से पहले हुआ है.

उम्मीद थी कि अभिषेक पिछले साल की एजीएम में गांगुली गुट को चुनौती देंगे, लेकिन आखिरी समय में वे पीछे हट गए. इससे विरोधी गुटों के बीच सुलह के बाद स्नेहाशीष गांगुली के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया था.अभिषेक की चिंताओं का जवाब देते हुए कैब ने कहा कि भ्रष्टाचार और कामकाज में खामियों के आरोप संस्था की असलियत को नहीं दर्शाते.

पत्र में कहा गया कि ‘भ्रष्टाचार, व्यवस्था में गड़बड़ी, चयन में ईमानदारी’ और पारदर्शिता की कमी के बारे में जताई गई आशंकाएं कैब के कामकाज को सही ढंग से नहीं दर्शाती हैं.संस्था ने कहा कि पिछले तीन दशकों में बीएन दत्त, जगमोहन डालमिया, सौरव गांगुली और खुद अभिषेक डालमिया के समय में ‘इस संस्था पर कभी भी व्यवस्था में गड़बड़ी के ऐसे आरोप नहीं लगे थे।.

पत्र में कहा गया, ‘‘इसलिए यह हैरानी की बात है कि हालिया बातचीत से ऐसा लगता है कि सिर्फ उनके कार्यकाल को छोड़कर बाकी सभी प्रशासकों के दौरान गड़बड़ियां रही हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह कहना कि सब कुछ सिर्फ एक खास कार्यकाल के दौरान ठीक से चल रहा था, और बाकी सभी के दौरान उसमें कमियां थीं, सही नहीं है.’’

संघ ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए कहा, ‘‘गलतियों को आम बात बताना या अधिकतर लोगों के बारे में मनगढ़ंत बातें करना तथ्यों को पूरी तरह गलत तरीके से पेश करना है, और यह उनकी सच्ची कोशिशों और इरादों का अपमान है. कैब के किसी भी पूर्व अध्यक्ष या सचिव ने कभी भी इस तरह का कोई सार्वजनिक पत्र जारी नहीं किया है, और संघ के सभी लोगों के लिए यह बहुत हैरानी की बात है.’’

कैब के बचाव का एक मुख्य बिंदु उच्चतम न्यायालय से मंजूर लोढ़ा सुधारों के तहत एक स्वतंत्र लोकपाल और नैतिक अधिकारी की व्यवस्था का होना था.

संघ ने बताया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य कैब के लोकपाल और नैतिक अधिकारी के तौर पर काम कर रहे हैं, और सभी हितधारक सबूतों के साथ उनके पास शिकायतें लेकर जा सकते हैं.

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