How To Handle An Angry Child: बच्चों का गुस्सा अक्सर माता-पिता के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन जाता है. कई बार छोटी-छोटी बातों पर बच्चा चिड़चिड़ा हो जाता है, रोने लगता है या जिद पर अड़ जाता है. ऐसे समय में माता-पिता को समझ नहीं आता कि सख्ती दिखानी चाहिए, समझाना चाहिए या बच्चे को कुछ समय के लिए अकेला छोड़ देना चाहिए. हालांकि, कई अभिभावकों का मानना है कि डांट-फटकार या बार-बार टोकने से स्थिति अक्सर और बिगड़ जाती है. कुछ माता-पिता ने अपने अनुभव साझा किए हैं, जिनकी मदद से उन्होंने अपने बच्चों के गुस्से को बेहतर तरीके से संभालना सीखा. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.
सबसे पहले खुद के व्यवहार पर भी ध्यान देना
सबसे पहले जरूरी है कि माता-पिता अपने व्यवहार पर ध्यान दें. कई अभिभावकों का कहना है कि जब वे बच्चों के गुस्से के जवाब में खुद भी ऊंची आवाज में बात करते थे, तो विवाद और बढ़ जाता था. लेकिन जब उन्होंने शांत रहकर जवाब देना शुरू किया, धीरे-धीरे बच्चों का व्यवहार भी बदलने लगा. बच्चे अक्सर वही सीखते हैं जो वे अपने घर में देखते हैं. इसलिए घर का माहौल सही रखने की जरूरत है.
बच्चों को सुनने की कोशिश
कुछ माता-पिता का अनुभव है कि बच्चों के गुस्से के समय उन्हें डांटने की बजाय उनकी बात सुनना ज्यादा असरदार साबित हुआ. जब बच्चे को यह महसूस होता है कि उसकी भावनाओं को समझा जा रहा है, तो वह खुद को बेहतर तरीके से व्यक्त कर पाता है. कई बार बच्चों को समाधान नहीं, बल्कि सिर्फ किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है जो उनकी बात ध्यान से सुन सके.
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बच्चों को गुस्से समझाएं कि गुस्सा कैसे शांत करें
इसके अलावा, कुछ परिवारों ने बच्चों को गुस्से पर कंट्रोल पाने की छोटी-छोटी तकनीकें सिखाईं. जैसे गुस्सा आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने की बजाय कुछ सेकंड रुकना, गहरी सांस लेना और धीरे-धीरे गिनती करना. शुरुआत में यह अभ्यास कठिन लग सकता है, लेकिन समय के साथ बच्चे इसे अपनी आदत बना लेते हैं और तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी ज्यादा संयमित रहते हैं.
फिजिकल एक्टिविटी से जोड़ कर रखना
एक्सपर्ट की तरह कई माता-पिता यह भी मानते हैं कि फिजिकल एक्टिविटी बच्चों के गुस्से को सकारात्मक दिशा देने में मदद करती हैं. दौड़ना, साइकिल चलाना, फुटबॉल खेलना या किसी भी तरह की सक्रिय गतिविधि बच्चों के भीतर जमा तनाव और एनर्जी को बाहर निकालने का अच्छा तरीका हो सकता है. इससे उनका मूड बेहतर होता है और गुस्सा धीरे-धीरे कम होने लगता है.
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