- नूर सिंगला ने सीए फाइनल में अखिल भारतीय प्रथम रैंक पाई.
- 499 अंक हासिल किए, पहले भी इंटर में थे उत्कृष्ट.
- पारिवारिक समर्थन, आत्म-अध्ययन सफलता के प्रमुख कारक बने.
- पढ़ाई के साथ क्रिकेट खेलने से मानसिक संतुलन बना.
पंजाब के पटियाला शहर के रहने वाले नूर सिंगला ने चार्टर्ड अकाउंटेंट फाइनल परीक्षा में देश भर में पहला स्थान हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार का बल्कि अपने राज्य का भी नाम रोशन कर दिया है. उनकी यह उपलब्धि आज उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत कर रहे हैं.
नूर सिंगला ने का फाइनल परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल 600 में से 499 अंक प्राप्त किया इतने बड़े स्तर की परीक्षा में सिर्फ स्थान प्राप्त करना आसान नहीं माना जाता है. लेकिन नूर ने अपनी लगातार मेहनत और अनुशासन तैयारी से मुकाम हासिल कर दिखाया उनकी सफलता के बाद परिवार और जानने वाला में खुशी का माहौल है.
पहले भी बन चुके हैं अपनी पहचान
यह पहली बार नहीं है जब नूर ने पढ़ाई में बड़ा रिकॉर्ड बनाया हो इससे पहले भी उन्होंने का इंटरमीडिएट परीक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर शानदार रैंक हासिल की थी लगातार अच्छे परिणाम में यह दिखाते हैं कि उन्होंने शुरुआत से ही अपने लक्ष्य को लेकर गंभीरता बनाए रखें और इस दिशा में मेहनत करते रहे.
शुरुआती शिक्षा कहां से ली?
नूर की शुरुआती शिक्षा पटियाला के डीएवी पब्लिक स्कूल से पूरी हुई. स्कूल शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए कॉमर्स को चूना और बीकॉम की डिग्री हासिल की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समय का बेहतर उपयोग किया और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा.
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परिवार का मेला सहयोग
हर सफलता के पीछे परिवार का बड़ा योगदान माना जाता है नूर की कहानी भी इससे अलग नहीं है. उनके पिता व्यवसाय से जुड़े हैं उनकी मटगरानी है परिवार ने हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए सकारात्मक माहौल दिया. उनकी बड़ी बहनों ने भी उन्हें आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया और पढ़ाई के दौरान मार्गदर्शन किया सेल्फ स्टडी और अनुशासन से नूर ने अपनी तैयारी में अनियमितता बनाए रखी. उन्होंने खुद पढ़ने और अपने तरीके से विषयों को समझाने पर अधिक ध्यान दिया उनका मानना है कि किसी भी परीक्षा में सफलता पाने के लिए लगातार अभ्यास और सही योजना और धैर्य बेहद जरूरी होता है.
खेल में भी है खास रुचि
नूर केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहे उन्होंने क्रिकेट खेलना बेहद पसंद है. उन्होंने स्कूल स्तर से लेकर राज्य स्तर तक विभिन्न प्रतियोगिता में भाग लिया उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ-साथ अपनी किसी भी पसंदीदा गतिविधि को समय देने से मानसिक संतुलन बना रहता है और प्रदर्शन बेहतर होता है.
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