Healthy Sleep Habits: जल्दी उठना सेहत का राज है या मिथक? जानिए नींद से जुड़ा ये चौंकाने वाला सच

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How Sleep Affects Lung Function And Breathing: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जल्दी उठना जैसे सफलता का पैमाना बन गया है. वहीं दूसरी तरफ देर रात तक जागना भी आम हो चुका है कि कभी काम की वजह से, तो कभी स्क्रीन के कारण. ऐसे में सवाल उठता है कि शरीर वास्तव में क्या चाहता है? इसका जवाब समय से कम और शरीर की लय, नियमितता और बायोलॉजिकल प्रोसेस से ज्यादा जुड़ा है. नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि शरीर की मरम्मत का एक तयशुदा सिस्टम है, और जब इसका समय बिगड़ता है तो असर साफ दिखता है.

कैसे तय होता है नींद और जागने का अनुभव

हमारे दिमाग में एक बॉडी क्लॉक होती है, जिसे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है. यह रोशनी और अंधेरे के हिसाब से काम करती है और शरीर को संकेत देती है कि कब जागना है और कब सोना है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, यही सिस्टम मेलाटोनिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन को कंट्रोल करता है, जो नींद और जागने के अनुभव को तय करते हैं. जब हमारी नींद इस लय के साथ तालमेल में होती है, तो शरीर बेहतर तरीके से काम करता है. लेकिन जब यह तालमेल बिगड़ता है, तो पूरी नींद लेने के बाद भी थकान बनी रहती है. 

देर से उठने का क्या होता है असर

आजकल देर से सोना और सुबह जल्दी उठना एक आम आदत बन चुकी है. लेकिन इसका सीधा असर नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है. खासकर गहरी नींद और REM स्लीप कम हो जाती है, जो शरीर की रिकवरी के लिए जरूरी होती है. डॉ. समीर गार्डे बताते हैं कि अगर कोई देर से सोता है और जल्दी उठता है, तो REM नींद पूरी नहीं हो पाती. यही वह समय होता है जब मांसपेशियां रिकवर करती हैं और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बेहतर रहता है. अस्थमा या लंग्स की समस्या वाले लोगों के लिए यह और भी नुकसानदेह हो सकता है. 

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क्या जल्दी उठने का कोई फायदा है

जल्दी उठना अक्सर अनुशासन और प्रोडक्टिविटी से जोड़ा जाता है. इसमें कुछ सच्चाई भी है क्योंकि सुबह की धूप शरीर की घड़ी को रीसेट करती है और दिनभर सतर्कता बढ़ाती है.  लेकिन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, वयस्कों को रोजाना 7-9 घंटे की नींद चाहिए, चाहे वे कब सोएं. यानी असली फायदा जल्दी उठने में नहीं, बल्कि एक नियमित नींद के पैटर्न में है. अनियमित नींद का असर सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता. यह शरीर में सूजन बढ़ा सकता है, लंग्स के कामकाज को प्रभावित करता है और इम्यूनिटी को कमजोर करता है. नेशनल हेल्थ सर्विस के स्टडी भी बताते हैं कि खराब नींद शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को कम कर देती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.



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