FSSAI Healthy Food Claims: आजकल बाजार में मिलने वाले पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर “नैचुरल”, “हेल्दी”, “ऑर्गेनिक”, “जीरो मैदा” और “हार्ट-हेल्दी” जैसे शब्द बहुत आम हो गए हैं. ये शब्द पैकेट खुलने से पहले ही ग्राहक को यह भरोसा दिला देते हैं कि प्रोडक्ट अच्छा है. लेकिन असल में ऐसा हमेशा नहीं होता. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI ने पिछले कुछ हफ्तों में कई बड़ी फूड कंपनियों को नोटिस भेजकर पूछा है कि क्या उनके पैकेट पर लिखे दावे प्रोडक्ट की असली क्वालिटी से मिलते हैं या नहीं. यह मामला इसलिए बहुत जरूरी है क्योंकि हम में से ज्यादातर लोग पैकेट के पीछे लिखी जानकारी को ध्यान से पढ़े बिना ही सिर्फ आगे लिखे शब्दों को देखकर प्रोडक्ट खरीद लेते हैं. ऐसे में हर किसी को ये बात जानना जरूरी है कि कोई बी समान खरिदते वक्त किन बातो को ध्यान रखना चाहिए. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
FSSAI के रडार पर कौन-कौन से दावे?
FSSAI ने ब्रेड, नूडल्स, चॉकलेट, जूस, कुकिंग ऑयल, सप्लीमेंट्स, पैकेज्ड पानी और कैफीन वाले ड्रिंक्स जैसी कई कैटेगरी की कंपनियों को नोटिस भेजा है. जिन शब्दों पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें “100 प्रतिशत नैचुरल”, “प्योर”, “फ्रेश”, “ऑर्गेनिक”, “हेल्दी”, “हार्ट-हेल्दी”, “एंटी-कैंसर”, “डिटॉक्स” और “जीरो मैदा” जैसे शब्द शामिल हैं. मसलन, बन और नूडल्स जैसे प्रोडक्ट्स पर “नैचुरल, प्योर, फ्रेश” लिखा होता है, लेकिन सवाल यह पूछा जा रहा है कि क्या इनकी सामग्री और बनाने की प्रक्रिया इस दावे के लिए सही है.
इसी तरह स्प्रेड और सप्लीमेंट्स पर “ऑर्गेनिक” लिखे होने पर भी पूछा गया है कि क्या इनके पास जरूरी सर्टिफिकेशन है.तेल, टोफू और पानी जैसे प्रोडक्ट्स पर “हेल्दी” या “डिटॉक्स” जैसे दावों को भी बिना पर्याप्त सबूत के इस्तेमाल करने पर सवाल उठाए गए हैं. यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि यह सिर्फ नोटिस हैं, अभी तक इन पर कोई फैसला नहीं आया है और कंपनियों के जवाब का इंतजार किया जा रहा है.
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एक्सपर्ट्स की राय और आम लोगों के लिए सलाह
पूर्व FSSAI प्रमुख पवन कुमार अग्रवाल का कहना है कि ज्यादातर ग्राहक पैकेट के पीछे लिखी जरूरी जानकारी को न तो पढ़ते हैं और न ही पूरी तरह समझते हैं, जिसका फायदा उठाकर कंपनियां आगे बड़े बड़े शब्द लिख देती हैं. न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स इसे “हेल्थ हेलो” इफेक्ट कहते हैं, जिसमें एक अच्छा दिखने वाला शब्द पूरे प्रोडक्ट को हेल्दी जैसा दिखा देता है, जबकि ऐसा नहीं होता.
एम्स की डायटीशियन मोनिता गहलोत सलाह देती हैं कि ग्राहकों को सबसे पहले पैकेट पर लिखी सामग्री की लिस्ट पढ़नी चाहिए, जिसमें वजन के हिसाब से सामग्री का क्रम होता है. इसके अलावा शुगर, सोडियम, फैट और प्रोटीन जैसी चिजों पर भी ध्यान देना चाहिए. फूड टेस्टिंग एक्सपर्ट अश्विन भद्री कहते हैं कि सबसे बड़ा खतरे का संकेत तब होता है जब पैकेट के आगे कोई बड़ा दावा लिखा हो, लेकिन उसका कोई सबूत पीछे न दिया गया हो. इसलिए हर ग्राहक को कोई भी प्रोडक्ट खरीदने से पहले पैकेट को पलटकर पीछे की जानकारी जरूर पढ़नी चाहिए.
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