उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी भर्ती संस्था UPPSC कैसे बनी? जानिए दिलचस्प कहानी

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  • यूपीपीएससी संवैधानिक संस्था है, 1 अप्रैल 1937 को गठित हुई.
  • यह सरकारी विभागों हेतु योग्य उम्मीदवारों की भर्ती करती है.
  • आयोग का मुख्यालय उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में है.
  • भर्ती परीक्षाओं सहित सेवा नियमों पर सरकार को सलाह देती.

UPPSC… एक ऐसा आयोग जिसके जरिए प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में युवाओं का सरकारी अफसर बनने का सपना पूरा होता है. मगर क्या आपने कभी सोचा है कि इस संस्था की नींव कब रखी गई थी और इसे संवैधानिक दर्जा क्यों मिला? आइए इसके बारे में डिटेल्स जानते हैं…

बताते चलें कि UPPSC एक संवैधानिक संस्था है. इसका गठन भारत के संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 के तहत हुआ है. संविधान में केंद्र और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है जिससे सरकारी सेवाओं में योग्य और प्रतिभाशाली उम्मीदवारों की भर्ती की जा सके.

कब हुआ था गठन?

UPPSC का गठन 1 अप्रैल 1937 को हुआ था. इसकी स्थापना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश सरकार के अलग-अलग विभागों और सेवाओं के लिए योग्य कैंडिडेट्स का चयन करना था. इसका मुख्यालय उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मौजूद है.

आयोग की कार्यप्रणाली उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग विनियम, 1976 के तहत संचालित होती है. समय-समय पर राज्य सरकार और आयोग की तरफ से भर्ती प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए सुधार किए गए हैं.

क्यों पड़ी लोक सेवा आयोग की जरूरत?

ब्रिटिश काल के वक्त भारतीयों की मांग थी कि हायर प्रशासनिक सेवाओं में उन्हें ज्यादा मौके दिए जाएं. इसको देखते हुए सरकारी सेवाओं में भर्ती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्थाओं की जरूरत हुई . रिपोर्ट्स के अनुसार 1 अप्रैल 1937 को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग अस्तित्व में आया.

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क्या है अयोग्य का काम?

UPPSC का कार्य राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती करना है. आयोग अलग-अलग पदों के लिए विभिन्न चयन प्रक्रियाओं के माध्यम से उम्मीदवारों का चयन करता है. कुछ पदों पर केवल साक्षात्कार (Interview) के आधार पर भर्ती की जाती है, जबकि कई पदों पर स्क्रीनिंग टेस्ट और इंटरव्यू आयोजित किए जाते हैं. इसके अलावा कुछ भर्तियों में केवल लिखित परीक्षा के आधार पर चयन किया जाता है.

भर्ती के अलावा भी हैं कई जिम्मेदारियां

UPPSC न केवल भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है बल्कि आयोग राज्य सरकार को सेवा नियमों से जुड़े मामलों में सलाह भी देता है. इसके अलावा विभागीय प्रमोशन से जुड़े मामलों पर भी आयोग की अहम भूमिका होती है.

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