Digital Safety For Children: इंटरनेट की दुनिया में बच्चों के लिए बिछा है जाल, 13 की उम्र से पहले सिखा दें ये सेफ्टी रूल्स

dda7648dafd43d945c8980e45b6d20d117820232599491257 original


Digital Safety Rules Every Parent Should Teach Before Age 13: आज के समय में बच्चे पहले से कहीं ज्यादा कम उम्र में इंटरनेट की दुनिया से जुड़ रहे हैं. मोबाइल, टैबलेट और स्मार्ट टीवी का इस्तेमाल करते हुए वे आसानी से वीडियो देखना, गेम खेलना और सोशल मीडिया चलाना सीख जाते हैं. लेकिन तकनीक का उपयोग करना और डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहना, दोनों अलग-अलग बातें हैं. यही वजह है कि 13 साल की उम्र से पहले बच्चों को कुछ जरूरी डिजिटल सुरक्षा नियम सिखाना बेहद जरूरी माना जाता है. 

बच्चों को सबसे पहले क्या समझाना चाहिए?

सबसे पहले बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि इंटरनेट पर हर व्यक्ति वैसा नहीं होता जैसा वह खुद को दिखाता है. कई बार लोग बच्चों का भरोसा जीतने के लिए खुद को दोस्त, गेमर या किसी परिचित व्यक्ति के रूप में पेश कर सकते हैं. ऐसे में बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि वे किसी अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें और निजी चैट में व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें.

इसे भी पढ़ें- समर वैकेशन पर अपने बच्चों को कराएं ये 5 एक्टिविटी, पढ़ाई-लिखाई में शार्प हो जाएगा दिमाग

इन चीजों से बच्चों को बचना सिखाएं

ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव भी डिजिटल शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है.  किसी अज्ञात लिंक पर क्लिक करना, संदिग्ध फाइल डाउनलोड करना या बिना सोचे-समझे क्यूआर कोड स्कैन करना कई बार परेशानी का कारण बन सकता है. बच्चों को सिखाना चाहिए कि अगर किसी संदेश में इनाम, मुफ्त उपहार या किसी जरूरी चेतावनी का दावा किया जाए, तो पहले किसी बड़े से उसकी पुष्टि करें. 

इंटरनेट को लेकर जागरूकता

इंटरनेट पर साझा की गई सामग्री को लेकर भी बच्चों को जागरूक बनाना जरूरी है. कई बच्चे सोचते हैं कि कोई फोटो, वीडियो या संदेश डिलीट करने के बाद हमेशा के लिए गायब हो जाता है, जबकि ऐसा नहीं होता. स्क्रीनशॉट या सेव की गई कॉपी के जरिए वह सामग्री लंबे समय तक मौजूद रह सकती है. इसलिए बच्चों को हमेशा सोच-समझकर ही कुछ पोस्ट करने की सलाह देनी चाहिए.

जानकारी देने से बचना चाहिए

डिजिटल सुरक्षा अहम नियम व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा से जुड़ा है. बच्चे अक्सर यह नहीं समझ पाते कि उनका नाम, स्कूल का नाम, फोन नंबर, घर का पता या लोकेशन जैसी छोटी-सी जानकारी भी उनके लिए जोखिम पैदा कर सकती है.  इसलिए उन्हें यह आदत डालनी चाहिए कि किसी भी ऐप, वेबसाइट या ऑनलाइन गेम में ऐसी जानकारी देने से पहले माता-पिता या किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति से सलाह लें.

डांटने से बचना चाहिए

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि ऑनलाइन कोई संदेश, तस्वीर, वीडियो या बातचीत उन्हें असहज महसूस कराए तो वे तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय वयस्क को इसकी जानकारी दें. कई बार बच्चे डांट या मोबाइल छिन जाने के डर से ऐसी बातें छिपा लेते हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो सकती है. एक्सपर्ट का मानना है कि डिजिटल सुरक्षा केवल एक बार दी जाने वाली सीख नहीं है. यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें माता-पिता को समय-समय पर बच्चों से बातचीत करनी चाहिए.

इसे भी पढ़ें- क्या आपका बच्चा भी पसंद करता है रूम में अकेले रहना, तुरंत करें ये 5 काम वरना…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *