Child Prefers To Be Alone: क्या आपका बच्चा भी पसंद करता है रूम में अकेले रहना, तुरंत करें ये 5 काम वरना…

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What To Do If Your Child Prefers To Stay Alone: अगर आपका बच्चा पहले परिवार के साथ ज्यादा समय बिताता था, लेकिन अब घंटों अपने कमरे में अकेले रहना पसंद करता है, तो जाहिर है कि यह बात आपको परेशान कर सकती है. कई माता-पिता को लगता है कि कहीं उनका बच्चा अकेलापन महसूस तो नहीं कर रहा या फिर किसी मानसिक तनाव से तो नहीं गुजर रहा. हालांकि हर बार ऐसा नहीं होता. एक्सपर्ट का कहना है कि बच्चों और खासकर किशोरों का अपने लिए निजी समय मांगना उनके विकास का सामान्य हिस्सा हो सकता हैय

दरअसल, जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, वे खुद को बेहतर तरीके से समझने और अपनी पहचान बनाने की कोशिश करते हैं. ऐसे में वे कुछ समय अकेले बिताना पसंद कर सकते हैं. लेकिन माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि बच्चा सिर्फ अपनी प्राइवेसी चाहता है या फिर वास्तव में सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ रहा है.

 बच्चे से सही सवाल पूछें

सिर्फ आज स्कूल कैसा रहा? पूछने के बजाय उससे थोड़े खास सवाल करें. जैसे आज लंच में किसके साथ बैठे, खेल के समय क्या किया या दोस्तों के साथ कोई मजेदार घटना हुई या नहीं. इन सवालों से आपको पता चलेगा कि बच्चा सामाजिक रूप से जुड़ा हुआ है या नहीं.

 उसकी प्राइवेसी का सम्मान करें

हर समय बच्चे के कमरे में झांकना या बार-बार सवाल पूछना रिश्ते में तनाव पैदा कर सकता है. बाल साइकोलॉजिस्ट डॉ. पीटर मार्शल के अनुसार, किशोरों को अपने विचारों को समझने और खुद को पहचानने के लिए निजी जगह की जरूरत होती है. इसलिए उनकी प्राइवेसी का सम्मान करना जरूरी है.

 जबरदस्ती मेलजोल न करवाएं

अगर बच्चा थोड़ा शांत स्वभाव का है, तो उसे हर समय लोगों के बीच रहने के लिए मजबूर न करें. हर बच्चे की पर्सनैलिटी अलग होती है. कुछ बच्चों को दोस्तों के साथ रहना पसंद होता है, जबकि कुछ अकेले समय बिताकर खुद को बेहतर महसूस करते हैं.

 परिवार से जुड़ने का माहौल बनाए रखें

भले ही बच्चा अपने कमरे में ज्यादा समय बिताता हो, लेकिन उसे यह महसूस होना चाहिए कि परिवार हमेशा उसके साथ है. इसके साथ में खाना खाना, वीकेंड पर समय बिताना या छोटी-छोटी बातचीत रिश्तों को मजबूत बनाए रखती है.

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व्यवहार में बदलाव पर नजर रखें

अगर बच्चा अचानक दोस्तों से दूरी बनाने लगे, पढ़ाई में रुचि कम हो जाए, हमेशा उदास दिखे या परिवार से भी बात न करे, तो यह चिंता का विषय हो सकता है. ऐसी स्थिति में किसी एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर रहेगा. एक्सपर्ट का मानना है कि हर बच्चे का अकेले रहना समस्या का संकेत नहीं होता. कई बार यह उनके आत्मविकास और आत्मविश्वास का हिस्सा होता है. ऐसे में माता-पिता का काम उन्हें समझना, भरोसा देना और जरूरत पड़ने पर सही दिशा दिखाना है. बच्चे को स्पेस देना और साथ ही उससे भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखना ही सबसे बेहतर तरीका माना जाता है.

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