Re-NEET 2026: री-नीट से पहले देशभर में सुरक्षा का रिहर्सल, मॉकड्रिल के जरिए तैयारियों की परख

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NEET-UG री-एग्जाम को लेकर देशभर में बड़े स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग राज्यों और शहरों में शनिवार को मॉक ड्रिल का आयोजन हुआ. इस दौरान परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा हुई.

नेशनल लेवल पर आयोजित इस मॉक ड्रिल में पुलिस विभाग, जिला प्रशासन, परीक्षा केंद्रों के अधिकारी, शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों ने भाग लिया. अधिकारियों ने परीक्षा के दिन लागू किए जाने वाले सुरक्षा प्रोटोकॉल का परीक्षण किया और अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का आकलन किया.

देशभर के कई परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश व्यवस्था, पहचान सत्यापन, अभ्यर्थियों की जांच, सीसीटीवी निगरानी, जैमर प्रणाली, कंट्रोल रूम संचालन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की जांच की गई. अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया कि परीक्षा के दौरान नकल, पेपर लीक या किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके. री-नीट परीक्षा में 22 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स शामिल होंगे. परीक्षा का आयोजन देश के 551 शहरों में होगा. एग्जाम 2 बजे से लेकर 5:15 तक किया गया था.

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क्या किया जा रहा है प्रयास?

रिपोर्ट्स के मुताबिक एग्जाम सेंटर पर तकनीकी निगरानी व्यवस्था स्थापित की जा रही है. सीसीटीवी कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग, जैमर की उपलब्धता और विशेष निगरानी टीमों की तैनाती के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है.

क्या-क्या हुआ?

अलग-अलग राज्यों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने परीक्षा केंद्रों का दौरा कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. कई स्थानों पर परीक्षा केंद्रों के भीतर और बाहर सुरक्षा बलों की तैनाती, यातायात प्रबंधन, अभ्यर्थियों के प्रवेश और निकास मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी का अभ्यास किया गया. साथ ही परीक्षा सामग्री की सुरक्षा और स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी से जुड़े प्रोटोकॉल की भी समीक्षा की गई.

एयरफोर्स ने पहुंचाए पेपर

री-नीट परीक्षा के सुरक्षित आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए प्रश्न पत्रों को भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचाया गया. सुरक्षा के मद्देनजर विशेष व्यवस्था के तहत प्रश्नपत्रों का परिवहन किया गया ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या देरी की संभावना न रहे.

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