Real Estate News: ‘पज़ेशन तक कोई EMI नहीं’ वाला ऑफ़र भारतीय रियल एस्टेट में, खासकर बन रहे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में सबसे ज़्यादा प्रसारित किए जाने वाले ऑफ़र्स में से एक बन गया है. जो खरीदार पहले से ही किराए, डाउनपेमेंट और प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों की जद्दोजहद से परेशान हैं, उनके लिए यह आइडिया काफी लोकप्रिय लगता है.
अक्सर खरीदार से बिल्डर वादा करता है कि अभी फ़्लैट बुक कर सकता है और साथ ही उसे तुरंत हर महीने लोन की किस्तें EMI नहीं भरनी होंगी. लेकिन कई घर खरीदार इसके पूरे सिस्टम को बाद में ही ठीक से समझ पाते हैं. कभी-कभी तब, जब उन्हें पता चलता है कि आर्थिक बोझ पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इसे बस अलग तरह से एडजस्ट कर दिया गया है.
EMI पूरी तरह से खत्म नहीं होती
सबसे खास बात यह कि ज़्यादातर मामलों में होम लोन असल में तब शुरू होता है, जब बैंक बिल्डर को पैसे देना शुरू करता है. इसी के साथ उसी समय से ब्याज भी लगना शुरू हो जाता है. “पज़ेशन मिलने तक कोई EMI नहीं” वाली कंडिशन में बिल्डर आमतौर पर खरीदार की ओर से पज़ेशन मिलने तक EMI से पहले वाली ब्याज चुकाने के लिए सहमत होता है.
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यही वजह है कि खरीदार को जल्द हर महीने पेमेंट करने का बोझ महसूस नहीं होता है. हालांकि लोन खरीदार के नाम पर ही चालू रहता है. अगर प्रोजेक्ट में देरी होती है या व्यवस्था बदलती है तो बाद में मुश्किलें आ सकती हैं.
प्रॉपर्टी की फ़ाइनल कीमत बढ़ सकती है
‘पज़ेशन तक कोई EMI नहीं’ वाली योजना से खरीदार को यह लग सकता है कि उन्हें कोई बड़ी आर्थिक छूट मिल रही है. हालांकि सच्चाई तो यह कि डेवलपर्स इन खर्चों (कैरिंग कॉस्ट) को फ़्लैट की पूरी कीमत में पहले ही जोड़ देते हैं. कुछ प्रोजेक्टो में ऐसी स्कीम वाले प्रोजेक्ट्स की कीमत, बिना ऐसी योजना वाले मिलते-जुलते फ़्लैट्स के मुकाबले में थोड़ी ज़्यादा होती सकती है.
कुछ मामलों में डेवलपर खुद खर्च उठाते हैं, क्योंकि कम मांग वाले समय में उनके लिए बिक्री की रफ़्तार बढ़ाना ज़्यादा ज़रूरी होता है. किसी भी स्थिति में खरीदारों को सिर्फ़ कम समय के लिए मिलने वाली EMI राहत पर ध्यान देने के बजाय, घर खरीदने के कुल खर्च के मुकाबले करनी चाहिए.
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प्रोजेक्ट मज़बूत होने पर काम करता है ऑफर
फाइनेंशल बायर्स के मुताबिक, अक्सर इस तरह की योजना पैसे के लेन देन में कंस्ट्रक्शन के दौरान मदद करती है. लेकिन सबसे बड़ी गलतफहमीं यह कि प्रोपर्टी खरीदने का सबसे बड़ी वजह ‘पज़ेशन तक कोई EMI नहीं’. याद रहे रिपेमेंट में मिलने वाली कुछ समय की राहत से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हैं, एक मज़बूत डेवलपर, पज़ेशन मिलने की सही समय-सीमा, ज़रूरी मंज़ूरियां और प्रोजेक्ट का सही ढंग से पूरा होना.