Explained: PM मोदी की अपील के बाद लगातार सस्ता हो रहा सोना! इस महीने 16,000 रुपए गिरा, एक्सपर्ट्स से समझें- खरीदें या नहीं?

25797a36f088b3c51c59b8e05a8f0a7117823939368161317 original


‘देशवासियों से मेरी गुजारिश है कि अगले एक साल तक सोना न खरीदें…’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अपील के बाद से सोने के दामों में जबरदस्त गिरावट आई है. 25 जून 2026 को 24 कैरेट सोना 2,156 रुपए गिरकर 1.40 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया. इस महीने की शुरुआत यानी 1 जून को सोना 1.56 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम था. यानी महज 25 दिनों में सोना 16,000 रुपए प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है. सवाल यह है कि क्या PM मोदी की बात मानकर अब भी सोना न खरीदें या यह मौका है खरीदारी का?

IBJA में 25 जून 2026 को सोने की कीमतें क्या रहीं?

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 25 जून 2026 को सोने के दाम:

कैरेट कीमत (रुपए/10 ग्राम)
24 कैरेट 1,40,022
22 कैरेट 1,28,260
18 कैरेट 1,05,017
14 कैरेट 81,913

सोने की कीमतों में इस साल का उतार-चढ़ाव:

तारीख 24 कैरेट सोना (रुपए/10 ग्राम)
31 दिसंबर 2025 1,33,000
29 जनवरी 2026 (सबसे ऊपर) 1,76,121
25 जून 2026 1,40,022

यानी 29 जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से सोना 36,099 रुपए सस्ता  हो चुका है.

PM मोदी की अपील का मकसद क्या था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी. इसका मकसद था- विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना और महंगे आयात पर निर्भरता कम करना. दरअसल, सोना भारत का कच्चे तेल के बाद दूसरा सबसे बड़ा आयात है. वित्त वर्ष 2026 में भारत ने लगभग 72 बिलियन डॉलर (करीब 6 लाख करोड़ रुपये) सोने के आयात पर खर्च किए. जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा और कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, तो भारत को तेल आयात के लिए ज्यादा डॉलर चाहिए थे. ऐसे में सोने के आयात पर रोक लगाना डॉलर बचाने का एक तरीका था.

सरकार ने सोने पर आयात शुल्क भी 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया. यानी 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) यानी कुल मिलाकर 15% टैक्स. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने PM मोदी की इस अपील का समर्थन किया है. उनका कहना है कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार बचाने में मदद मिलेगी.

सोने की कीमतें क्यों गिर रही हैं?

एक्सपर्ट्स सोने की कीमतें गिरने की 5 बड़ी वजहें बताते हैं:

  • अमेरिका-ईरान समझौता: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हुआ है. इससे पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा कम हो गया है. नतीजतन, निवेशक ‘सुरक्षित निवेश’ यानी सोने-चांदी से पैसा निकाल रहे हैं.
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख: फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया है कि वह ब्याज दरें बढ़ा सकता है. जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बिना ब्याज वाली चीजें (जैसे सोना) सस्ता हो जाता है.
  • मजबूत डॉलर: फेडरल रिजर्व के संकेतों के बाद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है. जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें गिरती हैं.
  • मुनाफावसूली: कुछ समय पहले सोने-चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं. जनवरी 2026 में सोना 1.76 लाख रुपए और चांदी 3.86 लाख रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी. इसके बाद निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए बेचना शुरू कर दिया.
  • PM मोदी की अपील: प्रधानमंत्री के सोना न खरीदने की गुजारिश का भी असर पड़ा है. गुजरात में तो सोने की मांग सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.

तो सोना खरीदें या नहीं, एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

जो एक्सपर्ट्स ‘खरीदारी’ के पक्ष में हैं:

  • टाटा म्यूचुअल फंड के जून 2026 के आउटलुक के मुताबिक, ‘सोने और चांदी के निवेशकों को शॉर्ट-टर्म वॉलेटिलिटी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन लंबी अवधि में सोना रखने का मामला मजबूत बना हुआ है.’ टाटा म्यूचुअल फंड एकमुश्त निवेश की बजाय स्टेप बाय स्टेप इन्वेस्टमेंट करने की सलाह देता है.
  • नुवामा प्रोफेशनल क्लाइंट्स ग्रुप में फॉरेक्स एंड कमोडिटीज हेड अभिलाष कोइक्कारा कहते हैं, ‘गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए.’
  • इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘मौजूदा निवेशकों को घबराकर बेचने से बचना चाहिए, क्योंकि लंबी अविधि का नजरिया पॉजिटिव बना हुआ है. नए निवेशक ETF में SIP के जरिए धीरे-धीरे निवेश कर सकते हैं, जबकि पोर्टफोलियो का 10-15% कीमती धातुओं में रखना चाहिए.’

जो एक्सपर्ट्स सतर्कता बरतने की सलाह देते हैं:

न तो सोना और न ही चांदी को पोर्टफोलियो का रिटर्न ड्राइवर (मुनाफा कमाने का मुख्य जरिया) मानना चाहिए.’

HDFC म्यूचुअल फंड के एक्सपर्ट फिरोज अजीज के मुताबिक, ‘तेजी के बाद सोना खरीदने की आदत एक पैटर्न है, जहां निवेशक चोटी की कीमत पर खरीदारी कर लेते हैं. यानी जब कीमतें बहुत गिर चुकी हों, तब खरीदारी करना चाहिए, न कि जब कीमतें आसमान पर हों.’ सोने की कीमतों में 5% उतार-चढ़ाव मुमकिन है.

आम आदमी के लिए आसान सलाह क्या है?

अगर आप सोना खरीदने की सोच रहे हैं:  

  • जल्दबाजी न करें: एक्सपर्ट्स का कहना है कि कीमतें और गिर सकती हैं. अगर आपको तुरंत जरूरत नहीं, तो थोड़ा इंतजार करें.
  • SIP की तरह खरीदें: एक साथ बड़ी खरीदारी की बजाय थोड़ा-थोड़ा खरीदें. इससे औसत लागत कम हो जाती है.
  • सिर्फ BIS हॉलमार्क वाला सोना खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें. हॉलमार्क में अल्फान्यूमेरिक कोड (जैसे AZ4524) होता है, जो बताता है कि सोना कितने कैरेट का है.
  • कीमत क्रॉस-चेक करें: खरीदने से पहले IBJA की वेबसाइट या अन्य सोर्स से उस दिन की सही कीमत चेक करें.
    पोर्टफोलियो का 10-15% ही रखें: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुल निवेश का 10-15% से ज्यादा सोने में न रखें.

अगर आप PM मोदी की अपील मानना चाहते हैं:

PM मोदी की अपील देश के हित में है. विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए यह जरूरी है. अगर आप जरूरी खरीदारी (जैसे शादी, त्योहार) नहीं कर रहे हैं, तो कुछ समय इंतजार करना देश के लिए फायदेमंद हो सकता है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *