सीबीएसई तीन भाषा फॉर्मूला पर नया अपडेट, कक्षा 9 के छात्रों को विदेशी भाषा जारी रखने की मिल सकती है अनुमति

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  • सीबीएसई ने पहले कक्षा 9 से दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य की.
  • वर्तमान 7, 8, 9 के छात्र अपनी पुरानी भाषा पढ़ेंगे.
  • नई भाषा नीति केवल कक्षा 6 के नए छात्रों पर लागू होगी.
  • इस बदलाव से स्कूलों को व्यवस्थाएं पुनः बदलनी पड़ेंगी.

CBSE Language Formula/Policy में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है. सूत्रों के मुताबिक, कक्षा 7, 8 और 9 के जो छात्र पहले से फ्रेंच, जर्मन जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं, उन्हें कक्षा 10 तक वही भाषा पढ़ने की अनुमति दी जा सकती है. यानी इन छात्रों पर नई भाषा नीति फिलहाल लागू नहीं होगी.

CBSE ने पहले क्या फैसला लिया था

दरअसल, CBSE ने 2 अप्रैल को नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा 6 से तीन-भाषा फॉर्मूला लागू करने का फैसला घोषित किया था. इसके बाद 15 मई को बोर्ड ने साफ किया कि इसी academic session से कक्षा 9 के छात्रों के लिए भी कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ना जरूरी होगा और इसे 1 जुलाई से लागू करने की तैयारी थी. इसके बाद कई स्कूलों ने अपनी भाषा व्यवस्था में बदलाव भी शुरू कर दिए. संस्कृत के शिक्षकों को appoint और फ़्रेंच के शिक्षकों को दूसरा सब्जेक्ट पढ़ाने के लिए तक बोला था.

अब सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड अपने इस फैसले में बदलाव कर सकता है. कक्षा 7, 8 और 9 के पहले से पढ़ रहे छात्रों को पुरानी भाषा व्यवस्था के साथ ही कक्षा 10 तक पढ़ाई पूरी करने की इजाजत दी जाएगी. नई व्यवस्था केवल आगे से कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले छात्रों पर लागू होगी.इस मामले से जुड़े CBSE के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगर पहले से पढ़ रहे छात्रों को पुरानी भाषा व्यवस्था जारी रखने की अनुमति मिलती है तो यह छात्रों के हित में होगा. उनका कहना है कि जो छात्र पिछले चार साल से फ्रेंच, जर्मन जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं, उनके लिए बीच सत्र में भाषा बदलना मुश्किल हो रहा था.

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आधिकारिक घोषणा का इंतजार

CBSE के अधिकारी ने कहा कि इस फैसले की आधिकारिक जानकारी अभी उन्हें भी नहीं दी गई है, हालांकि उन्हें पहले से अंदाजा था कि भाषा नीति में कुछ बदलाव हो सकता है.साथ ही यह भी कहा कि सत्र शुरू होने के बाद भाषा नीति में बदलाव क्यों किया गया, यह भी एक बड़ा सवाल है. इस मामले में 14 जुलाई को अदालत में जवाब दाखिल किया जाना है और उससे पहले यह फैसला लिया जा सकता है.

छात्रों और स्कूलों पर क्या होगा असर

रिपोर्ट के अनुसार, CBSE से जुड़े करीब 80 प्रतिशत स्कूलों ने कक्षा 9 के लिए संस्कृत समेत नई भाषा व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर ली थी.अगर अब फैसला बदलता है तो स्कूलों को अपनी तैयारियों और विषयों की व्यवस्था में फिर से बदलाव करना पड़ सकता है.

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