How Low Testosterone Increases Fracture Risk: ऑस्टियोपोरोसिस को लंबे समय तक महिलाओं, खासकर मेनोपॉजके बाद की महिलाओं की बीमारी माना जाता रहा है. यही वजह है कि ज्यादातर पुरुष इस खतरे को गंभीरता से नहीं लेते. लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि कमजोर हड्डियों की समस्या केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है. उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में भी हड्डियों का घनत्व कम हो सकता है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है. कई बार लोगों को तब तक इसका पता नहीं चलता, जब तक कोई गंभीर चोट या हड्डी टूटने की घटना न हो जाए.
क्या हो सकती है इससे दिक्कत?
आईएसआईसी मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के प्रमुख और ऑर्थोपेडिक्स विशेषज्ञ डॉ. विवेक महाजन ने TOI को बताया कि पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है क्योंकि उन्हें यह एहसास ही नहीं होता कि वे भी इसके जोखिम में हो सकते हैं. ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर और भुरभुरी होने लगती हैं. सामान्य रूप से शरीर पुरानी हड्डियों को हटाकर नई हड्डियां बनाता रहता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ यह संतुलन बिगड़ सकता है और हड्डियों का नुकसान तेजी से होने लगता है.
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टेस्टोस्टेरोन क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, टेस्टोस्टेरोन केवल मांसपेशियों, ऊर्जा और यौन हेल्थ के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में भी इसकी अहम भूमिका होती है. डॉ. विवेक महाजन के मुताबिक, यह हार्मोन जीवनभर हड्डियों के निर्माण और उनके रखरखाव में मदद करता है. लेकिन जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती है, टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने लगता है. इसका असर हड्डियों पर भी पड़ता है और शरीर नई हड्डियां बनाने की तुलना में अधिक हड्डियां खोने लगता है.
कम टेस्टोस्टेरोन का क्या होता है असर?
कम टेस्टोस्टेरोन का असर सिर्फ हड्डियों तक सीमित नहीं रहता. इससे मांसपेशियों की ताकत और द्रव्यमान भी कम हो सकता है, जिससे गिरने का खतरा बढ़ जाता है. कमजोर हड्डियां और गिरने की अधिक संभावना मिलकर फ्रैक्चर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती हैं. यही कारण है कि बढ़ती उम्र में कूल्हे, रीढ़ और कलाई की हड्डियों के फ्रैक्चर ज्यादा देखने को मिलते हैं.
क्या होते हैं इसके लक्षण?
ऑस्टियोपोरोसिस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते. इसी वजह से इसे साइलेंट डिजीज भी कहा जाता है. हालांकि लगातार पीठ दर्द, धीरे-धीरे लंबाई कम होना, झुकी हुई मुद्रा, मामूली चोट में हड्डी टूट जाना या लगातार शारीरिक कमजोरी जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. वहीं कम टेस्टोस्टेरोन वाले पुरुषों में थकान, सहनशक्ति में कमी और मांसपेशियों का कमजोर होना भी देखने को मिल सकता है.
कैसे इसको रोका जा सकता है?
अच्छी बात यह है कि समय रहते पहचान होने पर ऑस्टियोपोरोसिस को काफी हद तक रोका और नियंत्रित किया जा सकता है. कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर आहार, नियमित वॉक, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, धूम्रपान से दूरी और संतुलित वजन बनाए रखना हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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