नक्सल प्रभावित इलाके में ड्यूटी, फिर भी नहीं छोड़ा UPSC का सपना, अफसर ने रचा इतिहास


नक्सल प्रभावित इलाके में तैनाती, ऑपरेशन की जिम्मेदारियां और लंबे काम की घंटे के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में ऑल इंडिया रैंक 871 हासिल की.

नक्सल प्रभावित इलाके में तैनाती, ऑपरेशन की जिम्मेदारियां और लंबे काम की घंटे के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में ऑल इंडिया रैंक 871 हासिल की.

राजू के लिए यह सफर सिर्फ एक परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं था. एक तरफ वह छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के बीच अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, दूसरी और सिविल सेवा में जाने का सपना भी साथ लेकर चल रहे थे. उन्होंने अपने व्यस्त शेड्यूल के बीच पढ़ाई के लिए एक ऐसा अनुशासन बनाया, जिसे लगातार बनाए रखना उनके सफर की अहम वजह रहा.

राजू के लिए यह सफर सिर्फ एक परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं था. एक तरफ वह छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के बीच अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, दूसरी और सिविल सेवा में जाने का सपना भी साथ लेकर चल रहे थे. उन्होंने अपने व्यस्त शेड्यूल के बीच पढ़ाई के लिए एक ऐसा अनुशासन बनाया, जिसे लगातार बनाए रखना उनके सफर की अहम वजह रहा.

राजू वाग का जन्म महाराष्ट्र के नासिक जिले के इंदोरी गांव में हुआ. उनकी शुरुआती पढ़ाई जिला परिषद स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ाई की. आगे चलकर उन्होंने एनआईटी नागपुर से सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया और 2014 में अपनी डिग्री पूरी की. पढ़ाई के बाद उन्हें करीब 5 साल तक कोल इंडिया में काम किया.  इसके बाद उन्होंने सरकारी सेवा में जाने का फैसला किया और 2018 में सीएपीएफ परीक्षा पास कर सीआरपीएफ में शामिल हुए.

राजू वाग का जन्म महाराष्ट्र के नासिक जिले के इंदोरी गांव में हुआ. उनकी शुरुआती पढ़ाई जिला परिषद स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ाई की. आगे चलकर उन्होंने एनआईटी नागपुर से सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया और 2014 में अपनी डिग्री पूरी की. पढ़ाई के बाद उन्हें करीब 5 साल तक कोल इंडिया में काम किया.  इसके बाद उन्होंने सरकारी सेवा में जाने का फैसला किया और 2018 में सीएपीएफ परीक्षा पास कर सीआरपीएफ में शामिल हुए.

सीआरपीएफ में सेवा के दौरान राजू की पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सुकमा में हुई. यह इलाका माओवादी उग्रवाद से प्रभावित रहा है. यहां उनकी ड्यूटी के दौरान उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. राजू ने अपनी तैनाती के दौरान 32 इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस का पता लगाया. इस दौरान उन्होंने अभियानों में अपने साथी जवानों को खोने का दर्द भी देखा.  

सीआरपीएफ में सेवा के दौरान राजू की पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सुकमा में हुई. यह इलाका माओवादी उग्रवाद से प्रभावित रहा है. यहां उनकी ड्यूटी के दौरान उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. राजू ने अपनी तैनाती के दौरान 32 इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस का पता लगाया. इस दौरान उन्होंने अभियानों में अपने साथी जवानों को खोने का दर्द भी देखा.  

हालांकि उनकी भूमिका केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं रही. उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ काम किया और ऐसे क्षेत्रों में भरोसा कायम करने की कोशिश की, जहां लंबे समय से डर और संघर्ष का माहौल था.

हालांकि उनकी भूमिका केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं रही. उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ काम किया और ऐसे क्षेत्रों में भरोसा कायम करने की कोशिश की, जहां लंबे समय से डर और संघर्ष का माहौल था.

सुकमा में काम करने के दौरान राजू ने देखा कि कई बच्चों को पढ़ाई की सुविधा नहीं मिल पा रही. इसके बाद उन्होंने सीआरपीएफ कैंप को ही बच्चों के लिए क्लासरूम में बदल दिया और खुद उन्हें पढ़ना शुरू किया. यानी एक तरफ वह सुरक्षा से जुड़ी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे और दूसरी तरफ स्थानीय बच्चों की पढ़ाई में भी योगदान दे रहे थे.

सुकमा में काम करने के दौरान राजू ने देखा कि कई बच्चों को पढ़ाई की सुविधा नहीं मिल पा रही. इसके बाद उन्होंने सीआरपीएफ कैंप को ही बच्चों के लिए क्लासरूम में बदल दिया और खुद उन्हें पढ़ना शुरू किया. यानी एक तरफ वह सुरक्षा से जुड़ी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे और दूसरी तरफ स्थानीय बच्चों की पढ़ाई में भी योगदान दे रहे थे.

वहीं सीआरपीएफ की ड्यूटी के बीच यूपीएससी की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था. उन्हें ऑपरेशनल जिम्मेदारियां के कारण लंबे समय तक काम करना पड़ता था. इसके बावजूद राजू ने अपनी तैयारी के लिए एक रूटीन बनाया.

वहीं सीआरपीएफ की ड्यूटी के बीच यूपीएससी की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था. उन्हें ऑपरेशनल जिम्मेदारियां के कारण लंबे समय तक काम करना पड़ता था. इसके बावजूद राजू ने अपनी तैयारी के लिए एक रूटीन बनाया.

वह सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई करते थे और ड्यूटी के लंबे घंटे के बाद भी अपनी तैयारी जारी रखते थे. उन्होंने लंबे समय तक लगातार पढ़ने के बजाय रोज कुछ घंटे पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ने पर ध्यान दिया. उनकी तैयारी का आधार ज्यादा घंटे पढ़ना नहीं, बल्कि हर दिन पढ़ाई को जारी रखा और अनुशासन बनाए रखा था.

वह सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई करते थे और ड्यूटी के लंबे घंटे के बाद भी अपनी तैयारी जारी रखते थे. उन्होंने लंबे समय तक लगातार पढ़ने के बजाय रोज कुछ घंटे पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ने पर ध्यान दिया. उनकी तैयारी का आधार ज्यादा घंटे पढ़ना नहीं, बल्कि हर दिन पढ़ाई को जारी रखा और अनुशासन बनाए रखा था.

राजू वाघ की मेहनत का नतीजा यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जामिनेशन 2024 के रिजल्ट में सामने आया. उन्होंने परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 871 हासिल की. खास बात यह रही कि जिस समय यूपीएससी का रिजल्ट आया, उस समय भी राजू किसी जश्न की तैयारी में नहीं थे. वह एक और अंतिम माओ ऑपरेशन की तैयारी कर रहे थे. रिजल्ट की खबर मिलने के बाद भी राजू अपनी ड्यूटी पर लौट गए.

राजू वाघ की मेहनत का नतीजा यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जामिनेशन 2024 के रिजल्ट में सामने आया. उन्होंने परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 871 हासिल की. खास बात यह रही कि जिस समय यूपीएससी का रिजल्ट आया, उस समय भी राजू किसी जश्न की तैयारी में नहीं थे. वह एक और अंतिम माओ ऑपरेशन की तैयारी कर रहे थे. रिजल्ट की खबर मिलने के बाद भी राजू अपनी ड्यूटी पर लौट गए.

यूपीएससी परीक्षा में सफलता के बाद राजू वाघ ने अगस्त 2025 में इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट सर्विस ज्वाइन की फिलहाल उनकी पोस्टिंग शिमला हिमाचल प्रदेश में है.

यूपीएससी परीक्षा में सफलता के बाद राजू वाघ ने अगस्त 2025 में इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट सर्विस ज्वाइन की फिलहाल उनकी पोस्टिंग शिमला हिमाचल प्रदेश में है.

Published at : 13 Aug 2026 11:16 AM (IST)

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