- दिल्ली आबकारी विभाग को ₹1,038 करोड़ राजस्व प्राप्त हुआ.
- यह पिछली तिमाही से 17% अधिक, आय में वृद्धि दर्शा रहा है.
- शराब ब्रांडों की अधिक उपलब्धता से ग्राहक दिल्ली लौट रहे हैं.
- आधुनिक दुकानों और नीतिगत स्थिरता ने प्रीमियम ब्रांड उपलब्ध कराए.
Delhi Excise Department Revenue: दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग ने वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में शराब पर टैक्स से मोटी कमाई की है.
जानकारी के मुताबिक, आबकारी विभाग ने कारोबारी साल 2026-27 में अप्रैल से जून के दौरान लगभग 1,038 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 17% ज्यादा है. अधिकारियों का कहना है कि रेवेन्यू में आए इस उछाल का एक बड़ा कारण सरकारी दुकानों में इस साल शराब के विभिन्न ब्रांडों की अधिक उपलब्धता है. पिछले साल कमाई का आंकड़ा 885 करोड़ रुपये था.
रेवेन्यू कलेक्शन का टोटल टारगेट कितना?
इस बारे में एक अधिकारी ने कहा, “इस साल की चालू तिमाही में एक्साइज़ रेवेन्यू में लगभग 17% की बढ़ोतरी हुई है और यह 1,038 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 885 करोड़ रुपये था.”
अधिकारियों का कहना है कि 2025-26 में लगभग 7,148 करोड़ रुपये के कुल रेवेन्यू कलेक्शन के मुकाबले 2026-27 के लिए कुल एक्साइज रेवेन्यू का लक्ष्य 7,200 करोड़ रुपये तय किया गया है. उन्हें उम्मीद है कि रजिस्टर्ड ब्रांड्स की संख्या बढ़ने से ग्राहकों को दुकानों पर ज्यादा विकल्प मिलेंगे और इससे दिल्ली को सालों से खोया हुआ मार्केट शेयर वापस पाने में मदद मिलेगी. बता दें कि दिल्ली के सरकारी ठेकों पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड्स की हिस्सेदारी बढ़कर 54% तक पहुंच गई है, जो पिछले साल महज 24% थी.
कैसे बढ़ी कमाई?
पहले दिल्ली में चुनिंदा ब्रांड्स न मिलने की वजह से ग्राहक नोएडा, गुरुग्राम का रुख करते थे. वहां शराब के ज्यादा विकल्प और बेहतर कीमत के चलते खरीदार राजधानी छोड़कर वहीं जा रहे थे.
पिछले साल पॉलिसी लागू करने को लेकर अनिश्चितता के कारण रजिस्ट्रेशन की रफ्तार धीमी हो गई थी, लेकिन अब सरकार द्वारा आबकारी नीति को एक और साल बढ़ाने के फैसले से बाजार में अनिश्चितता खत्म हो गई है और कंपनियों ने अपने ब्रांड्स के रजिस्ट्रेशन की रफ्तार भी तेज कर दी है. इससे दिल्ली के रिटेल मार्केट में शराब की वैरायटी बढ़ाने की कोशिशों को फिर से बढ़ावा मिला है.
दिल्ली की चारों सरकारी एजेंसियों (DSSIDC, DTTDC, DSCSC और DCCWS) ने कई बड़े मॉर्डन वॉक-इन स्टोर्स खोले हैं, जहां ग्राहकों को कई प्रीमियम ब्रांड्स के शराब आसानी से मिल जाते हैं.
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