8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर पर क्या है सरकार का गेम प्लान? कहीं 2.28 तक सिमट कर न रह जाए बात

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  • आठवें वेतन आयोग पर चर्चा तेज, टीम राज्यों का दौरा कर रही.
  • सरकारी खजाने पर फिटमेंट फैक्टर के बोझ का आकलन अहम.
  • कर्मचारी 3.83 फैक्टर मांग रहे, सरकार सतर्कता से फैसला लेगी.

8th Pay Commission Fitment Factor News: देश में करोड़ो कर्मचारियों और पेंशनर्स को आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का बेसब्री से इंतजार है. इस पर चर्चाओं का सिलसिला भी अब तेज होने लगा है. इस बीच, वेतन आयोग की टीम अलग-अलग राज्यों का दौरा कर कर्मचारी संगठनों, यूनियनों व अधिकारियों संग आमने-सामने बातचीत कर रही है.

अब देखने वाली बात यह है कि अंत में जाकर फिटमेंट फैक्टर पर आयोग और सरकार का रुख क्या होगा? अभी तक भले ही इस पर आधिकारिक रूप से कोई फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन देशव्यापी बैठकों और शुरुआती चर्चाओं से संकेत मिल रहे हैं कि सरकारी खजाने पर पड़ने वाले भारी बोझ को देखते हुए आयोग फिटमेंट फैक्टर को लेकर संतुलित और सतर्क रुख अपना सकता है.

कर्मचारियों की क्या है डिमांड?

नेशनल काउंसिल (NC-JCM) और रेलवे सहित विभिन्न यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3.15-3.83 के बीच रखने की मांग की है. अगर फिटमेंट फैक्टर 3.83 तय किया जाता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18000 से बढ़कर सीधे 68940 रुपये तक पहुंच जाएगी. हालांकि, सरकार सरकारी खजाने पर बढ़ते दबाव को देखते हुए 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनरों के लिए शुरुआती फिटमेंट को 1.83-2.28 के बीच तय कर सकती है.

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पर बात करते हुए संबंधित एक सीनियर अधिकारी ने कहा है कि अब अंतिम दौर में फिटमेंट फैक्टर की संभावित रेंज, राज्य सरकारों के साथ बातचीत और संशोधित वेतन व पेंशन ढांचे के वित्तीय असर के आकलन पर फोकस किया जा रहा है. सैलरी और पेंशन के फाइनल स्ट्रक्चर को तय करने में केंद्र और राज्य सरकारों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ का आकलन निर्णायक भूमिका निभा सकता है. 

वित्तीय बोझ का आकलन

फिटमेंट फैक्टर के बढ़ने से न केवल सैलरी बढ़ती है, बल्कि पेंशन में भी इजाफा होता है. ऊपर से एरियर का भी अलग से मोटा खर्चा है. ऐसे में सरकार राजकोषीय विवेक को देखते हुए 2.28-2.86 के बीच कोई फॉर्मूला चुन सकता है. अगर 2.28 का फिटमेंट फैक्टर तय होता है, तो बेसिक सैलरी में लगभग 34.1% का इजाफा होगा, जो 41000 रुपये होगी. बेशक सरकार फिटमेंट फैक्टर को लेकर सतर्क रुख अपना सकती है क्योंकि इसमें थोड़ा सा भी उतार-चढ़ाव सरकारी खर्च पर बड़ा असर डालती है.

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