Anemia Mukt Bharat Abhiyan: एनीमिया मुक्त कैसे होगा भारत? सरकार ने बदला पूरा मॉडल, अब डिजिटल ट्रैकिंग से होगा इलाज

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How India Plans to Become Anemia Free: भारत में एनीमिया आज भी सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है. इसका असर सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि गर्भवती महिलाओं, बच्चों और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. यही वजह है कि अब केंद्र सरकार ने देश को एनीमिया मुक्त बनाने के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. सरकार का मानना है कि सिर्फ आयरन की गोलियां बांटने से इस समस्या पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सकता. इसलिए अब जांच, इलाज, सही खानपान और डिजिटल निगरानी को भी अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है.

नई गाइडलाइन जारी किया गया

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने एनीमिया मुक्त भारत अभियान के संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं. नई गाइडलाइन के तहत अब पुराने 6x6x6 मॉडल की जगह 7x7x7 रणनीति लागू की जाएगी. इसका उद्देश्य एनीमिया की समय रहते पहचान करना, इलाज सुनिश्चित करना और मरीजों की लगातार निगरानी करना है. इस नई रणनीति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पहली बार कम वजन वाले नवजात शिशुओं (0 से 6 महीने) को भी अभियान में शामिल किया गया है. सरकार का मानना है कि अगर जीवन की शुरुआत से ही एनीमिया की रोकथाम पर काम किया जाए, तो आगे चलकर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

इन चीजों को जोड़ा गया

सरकार ने अभियान में ‘ईटिंग राइट’ पहल को भी जोड़ा है. इसके तहत लोगों को आयरन से भरपूर और संतुलित भोजन को अपनी रोजमर्रा की आदत बनाने के लिए जागरूक किया जाएगा. सिर्फ दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय पोषण के जरिए एनीमिया को रोकने पर भी बराबर जोर दिया जाएगा. नई गाइडलाइन में पहले अपनाए जा रहे टी3 मॉडल टेस्ट, ट्रीट और टॉक को अब टी4 मॉडल में बदल दिया गया है. इसमें ‘ट्रैक’ को भी शामिल किया गया है. यानी किसी व्यक्ति में एनीमिया मिलने के बाद सिर्फ इलाज ही नहीं होगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि इलाज का असर हो रहा है या नहीं और जरूरत पड़ने पर आगे की चिकित्सा समय पर मिल रही है या नहीं.

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जिन पर दवाओं का असर नहीं होता उनके लिए क्या?

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली उन महिलाओं के लिए, जिन्हें गंभीर एनीमिया है या जिन पर आयरन की गोलियों का असर नहीं होता, अब नस के जरिए आयरन देने की व्यवस्था भी राष्ट्रीय उपचार प्रोटोकॉल का हिस्सा होगी. इसके लिए फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज और आयरन सुक्रोज जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाएगा. अभियान को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम भी तैयार किया गया है. गर्भवती महिलाओं की हीमोग्लोबिन जांच का रिकॉर्ड जननी पोर्टल पर दर्ज होगा, जबकि बच्चों की जानकारी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम औरयू-विन पोर्टल पर अपलोड की जाएगी. बाद में इन सभी प्लेटफॉर्म को एकीकृत एनीमिया मुक्त भारत पोर्टल से जोड़ा जाएगा. इससे सरकार को यह पता लगाने में आसानी होगी कि किस क्षेत्र में एनीमिया की स्थिति कैसी है और किन लोगों तक इलाज या पोषण सेवाएं अभी भी नहीं पहुंच पाई हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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