ऐतिहासिक गिरावट! मंदी और वैश्विक तनाव के आगे बेबस हुआ रुपया, पहली बार 96 के पार निकला डॉलर

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Rupee Crash: भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है. शुक्रवार को पहली बार ऐसा हुआ जब डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के स्तर के पार चला गया. यानी अब 1 डॉलर खरीदने के लिए पहले से ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है. बता दें कि कल ही यानी 14 मई को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 95.74 से खिसक कर 95.86 पर आता दिखा, इसका मतलब है कि सीधा 20 पैसे की कमी आई. इसके पहले भी 13 मई को भी रुपया 95.80 पर पहुंचने के बाद 95.66 प्रति डॉलर पर नजर आया. लेकिन अब तो हालात बद से बदतर हो गए हैं और रुपया 96 पहुंच गया है.  

आखिर रुपया कमजोर क्यों हो रहा है?

पिछले कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी हलचल है. मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की वजह से कच्चे तेल की कीमतें ऊपर जा रही हैं. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में जब तेल महंगा होता है तो भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. इसी वजह से रुपये पर दबाव बढ़ता है और उसकी कीमत गिरने लगती है.

इस समय रुपये में गिरावट की सबसे बड़ी वजह बढ़ती तेल कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मानी जा रही है. विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं और डॉलर खरीद रहे हैं. इससे डॉलर मजबूत हो रहा है और रुपया कमजोर पड़ रहा है. इसके अलावा दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता भी बनी हुई है. ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की तरफ जाते हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर की मांग और बढ़ जाती है.

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आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?

रुपये के कमजोर होने का असर धीरे-धीरे हर व्यक्ति तक पहुंचता है. सबसे पहले पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं. क्योंकि भारत तेल बाहर से खरीदता है और भुगतान डॉलर में होता है. अगर तेल महंगा हुआ तो ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ेगा. इसका असर सब्जियों, राशन, दूध और रोजमर्रा की दूसरी चीजों पर भी दिखाई दे सकता है. यानी आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ने की आशंका है. इसके अलावा मोबाइल, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान भी महंगे हो सकते हैं, क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाला काफी सामान विदेशों से आता है.

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शेयर बाजार पर भी असर

रुपये में गिरावट का असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला. निवेशकों में थोड़ी चिंता का माहौल है. हालांकि आईटी कंपनियों को कमजोर रुपये से फायदा हो सकता है, क्योंकि उनकी कमाई डॉलर में होती है. लेकिन बाकी सेक्टरों के लिए यह स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं मानी जा रही.

क्या डॉलर 100 रुपये तक जाएगा?

अब बाजार में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या आने वाले समय में डॉलर 100 रुपये तक पहुंच सकता है. फिलहाल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसा तुरंत होना मुश्किल है, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़े तो दबाव बढ़ सकता है. हालांकि RBI लगातार हालात पर नजर रखे हुए है. जरूरत पड़ने पर रिजर्व बैंक बाजार में दखल देकर रुपये को संभालने की कोशिश कर सकता है. फिलहाल, आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर रुपया लगातार कमजोर होता रहा, तो महंगाई और बढ़ सकती है.



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