Animal Behind The World’s Most Expensive Coffee: दुनिया में कॉफी पीने वालों की कमी नहीं है, लेकिन क्या आप ऐसी कॉफी के बारे में जानते हैं, जो एक जंगली जानवर की पॉटी से तैयार होती है? सुनने में यह अजीब जरूर लगता है, लेकिन यही सच है. इस खास कॉफी का नाम कोपी लुवाक है, जिसे दुनिया की सबसे महंगी कॉफी में गिना जाता है. इसकी कीमत इतनी ज्यादा है कि एक कप के लिए 8 हजार रुपये से अधिक तक चुकाने पड़ सकते हैं, जबकि एक किलो कॉफी 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपये से भी ज्यादा में बिकती है.
क्या है इसके पीछे की कहानी?
इस अनोखी कॉफी की कहानी दक्षिण-पूर्व एशिया में पाए जाने वाले एशियन पाम सिवेट नाम के छोटे जंगली जानवर से जुड़ी है. यह जानवर रात में सक्रिय रहता है और जंगलों में अकेले रहना पसंद करता है. पहले इसका भोजन फल, जामुन, कीड़े-मकोड़े और छोटे जीव होते थे, लेकिन जब इंडोनेशिया के जावा, सुमात्रा और सुलावेसी जैसे इलाकों में कॉफी की खेती शुरू हुई तो इसे कॉफी चेरी बेहद पसंद आने लगी.
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पॉटी से बाहर निकलता है
सिवेट पके हुए कॉफी चेरी खा जाता है, लेकिन उसके पेट में मौजूद बीज पूरी तरह पचते नहीं हैं. यही बीज उसकी पॉटी के साथ बाहर निकल आते हैं. सालों पहले कॉफी बागानों में काम करने वाले मजदूरों ने इस बात पर ध्यान दिया. उन्होंने इन बीजों को इकट्ठा किया, अच्छी तरह साफ किया और फिर उन्हें भूनकर कॉफी बनाई. हैरानी की बात यह थी कि इस तरह तैयार कॉफी का स्वाद सामान्य कॉफी से बिल्कुल अलग निकला.
क्यों होता है यह खास?
विशेषज्ञों के मुताबिक, सिवेट के डाइजेशन सिस्टम से गुजरने के दौरान प्राकृतिक एंजाइम और पेट के एसिड कॉफी बीन्स में मौजूद कुछ प्रोटीन को तोड़ देते हैं. इससे कॉफी की कड़वाहट कम हो जाती है और उसका स्वाद ज्यादा स्मूद, खुशबूदार और हल्का चॉकलेटी हो जाता है. यही वजह है कि इसे दुनियाभर के कई कॉफी शौकीन बेहद खास मानते हैं. जंगल में रहने वाले सिवेट सिर्फ सबसे अच्छी और पूरी तरह पकी हुई कॉफी चेरी ही चुनते हैं. यही कारण है कि प्राकृतिक तरीके से तैयार होने वाली कोपी लुवाक की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है. लेकिन इसकी बढ़ती लोकप्रियता ने इस जानवर के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है.
अब होता है इनके ऊपर अत्याचार
आज बड़ी मात्रा में कोपी लुवाक बनाने के लिए कई जगह सिवेट को जंगल से पकड़कर छोटे-छोटे पिंजरों में कैद कर दिया जाता है. उन्हें जबरन सिर्फ कॉफी चेरी खिलाई जाती है, जबकि उनका प्राकृतिक भोजन और खुला वातावरण उनसे छीन लिया जाता है. लगातार कैद में रहने और एक जैसा भोजन मिलने से ये जानवर तनाव, कुपोषण और कई बीमारियों का शिकार हो जाते हैं. कई मामलों में उनकी समय से पहले मौत भी हो जाती है. हालांकि इंडोनेशिया में जंगली सिवेट को पकड़ने पर नियम और सीमाएं तय हैं, लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि इनका पालन हर जगह प्रभावी ढंग से नहीं हो पाता. यही वजह है कि कोपी लुवाक का कारोबार आज भी पशु क्रूरता और वन्यजीव संरक्षण को लेकर सवालों के घेरे में रहता है.
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