Toddler Behaviours That Are Completely Normal: बच्चों की परवरिश जितनी खूबसूरत होती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी. खासकर जब घर में टॉडलर यानी 1 से 3 साल की उम्र का बच्चा हो, तो माता-पिता अक्सर उसकी कुछ आदतों से परेशान हो जाते हैं. हर बात पर नहीं कहना, छोटी-छोटी बातों पर रोना या गुस्सा करना, खाना फेंक देना जैसी हरकतें कई बार पैरेंट्स को सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि आखिर उनका बच्चा ऐसा क्यों कर रहा है. लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. तान्या ऑल्टमैन का कहना है कि इनमें से ज्यादातर व्यवहार सामान्य हैं और बच्चे के विकास का स्वाभाविक हिस्सा होते हैं.
हर बात पर नहीं कहता है बच्चा, तो क्या करें?
डॉ. तान्या ऑल्टमैन ने TOI को बताया कि अगर आपका बच्चा हर बात पर नहीं कहता है तो इसे जिद या बदतमीजी समझने की जरूरत नहीं है. दरअसल, यह इस बात का संकेत है कि बच्चा अपनी स्वतंत्र पहचान बनाना सीख रहा है. इस उम्र में बच्चे यह समझने लगते हैं कि उनकी अपनी पसंद और राय भी हो सकती है. नहीं कहना उनके लिए अपने फैसले जताने का एक तरीका बन जाता है.
खाना फेंकने का आदत का क्या करें?
खाने के समय बच्चों का खाना फेंकना भी कई माता-पिता के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है. हालांकि यह आदत गंदगी जरूर फैलाती है, लेकिन इसके पीछे भी एक सीखने की प्रक्रिया छिपी होती है. डॉ. तान्या ऑल्टमैन बताती हैं कि बच्चे इस तरह कारण और परिणाम को समझने की कोशिश करते हैं. कई बार यह इस बात का भी संकेत होता है कि उनका पेट भर चुका है और अब वे खाना नहीं खाना चाहते.
इसे भी पढ़ेंः कॉन्सर्ट्स और शाही शादियों से इवेंट इंडस्ट्री में बूम, तकनीक में भी चीन को टक्कर दे रहा भारत
बच्चों की इस आदत को ऐसे डील करें
अक्सर देखा जाता है कि बच्चे बहुत छोटी बातों पर जोर-जोर से रोने लगते हैं या गुस्से में आ जाते हैं. कभी पसंद का कप न मिलने पर तो कभी किसी मामूली बदलाव पर उनका मूड खराब हो जाता है. डॉ. तान्या ऑल्टमैन कहती हैं कि इस उम्र में बच्चों के दिमाग का वह हिस्सा पूरी तरह विकसित नहीं होता जो इमोशनल को कंट्रोल करता है. इसलिए जो बात बड़ों को मामूली लगती है, वह बच्चे के लिए बहुत बड़ी हो सकती है.
कई टॉडलर एक ही कहानी बार-बार सुनना चाहते हैं, वही गाना सुनते हैं या हर दिन एक जैसी दिनचर्या पसंद करते हैं। माता-पिता को यह आदत भले ही उबाऊ लगे, लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि दोहराव बच्चों को सुरक्षा का एहसास कराता है. परिचित चीजें उन्हें सहज महसूस कराती हैं और सीखने की प्रक्रिया को भी मजबूत बनाती हैं.
बच्चे खिलौने क्यों नहीं देते?
खिलौने या अपनी चीजें किसी और को देने से मना करना भी इस उम्र के बच्चों में आम बात है. डॉ. तान्या ऑल्टमैन के मुताबिक, टॉडलर स्वाभाविक रूप से खुद पर केंद्रित होते हैं. साझा करने की असली समझ आमतौर पर तीन से चार साल की उम्र के आसपास विकसित होती है. इसलिए अगर बच्चा अपनी चीजें शेयर नहीं करना चाहता, तो इसे गलत व्यवहार मानने के बजाय उसकी उम्र के हिसाब से समझना चाहिए.
इसे भी पढ़ें- पीएम ने बताए स्क्रीन टाइम से जुड़े ये 4 रूल्स, हर बच्चे के पैरेंट्स को करने चाहिए फॉलो