Fuel Shortage: जिस सस्ते रूसी तेल पर लड़ रहे भारत-अमेरिका, वहां ही हो गई भारी किल्लत, अब कैसे सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल

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Fuel Shortage: बीते कुछ महीनों में भारत ने तेल और गैस की किल्लत देखी. यूएस और ईरान के युद्ध की वजह से क्रूड ऑइल की आवाजाही प्रभावित हुई, जिसकी वजह से पेट्रोल- डीजल के दाम भी बढ़े. जिसके बाद भारत सस्ते रूसी तेल के ऊपर पूरी तरह से डिपेंडेंट होने की सोच रहा था. लेकिन अब खबरें हैं कि रूस में भी तेल की किल्लत शुरू हो गई है. ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि खुद रूप के राष्ट्रपति ने कहा बताया है.

रूस में ईंधन की किल्लत
दरअसल हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कुबूल किया है कि यूक्रेन के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों की वजह से यहां ईंधन की किल्लत होने लगी है. इस बारे में खुद पुतिन ने बात करते हुए बताया है कि, ‘अब रूस का ध्यान अपनी हवाई सुरक्षा (एयर डिफेंस) बढ़ाने और खासकर क्रीमिया तक ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है.’

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पुतिन ने आगे कहा, ‘पिछले कुछ हफ्तों में यूक्रेन ने रूस की कई तेल रिफाइनरियों और ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया है. इससे रूस के कई इलाकों में पेट्रोल-डीजल की कमी हो गई है और पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग रही हैं. यूक्रेन ने लंबी दूरी के हमलों को रोकने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन रूस को लगता है कि यूक्रेन ऐसा इसलिए चाहता है क्योंकि रूस के जवाबी हमले उसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं.’

इन क्षेत्रों पर कब्जा करने की फिराक में रूस
पुतिन ने ये भी कहा कि फिलहाल रूस का लक्ष्य डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज़्झिया क्षेत्रों पर पूरी तरह कब्जा करना है. जब तक उनका ये लक्ष्य पूरा नहीं होता, तब तक रूस किसी ऐसे शांति समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी शर्तों के मुताबिक न हो. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर जल्द ही फिर से बातचीत शुरू करेंगे. उन्होंने ये भी कहा कि बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको शांति वार्ता में मदद कर सकते हैं.

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नहीं किए समझौते पर हस्ताक्षर
इस बातचीत के दौरान पुतिन ने ये भी बताया कि पिछले साल अलास्का में उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत के दौरान यूक्रेन युद्ध खत्म करने के कुछ संभावित तरीकों पर चर्चा हुई थी, लेकिन कोई आधिकारिक समझौता या दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं हुए थे.

कैसे होगी भारत में पेट्रोल- डीजल की कीमतें कम?
वैसे तो ईरान और यूएक के बीच अब युद्धविराम लग गया है, लेकिन ये महज 60 दिन का ही अनुबंध है. ऐसे में 60 दिन के बाद स्थिति दोबारा वैसी ही हो सकती है, जिस वजह से भारत ने रूस को ऐसी स्थिति में सहारे के रूप में देखा था. लेकिन अब जब रूस में भी तेल की किल्लत है तो भारत में पेट्रोल- डीजल की कीमतें कैसे होंगी इस बात पर संशय बना हुआ है. यदि स्थिति नहीं सुधरती है तो तेल के दामें में बढ़ोतरी भी हो सकती है. 



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