Milky Urine: सुबह-सुबह होती है एकदम दूधिया पेशाब? लापरवाही न करें तुरंत डॉक्टर से मिलें

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Causes of Milky Urine: हेल्थ एक्सपर्ट्स अक्सर कहते हैं कि इंसान के यूरिन से शरीर में होने वाली कई बीमारियों के संकेत मिल सकते हैं. पेशाब का रंग यह बता सकता है कि आपका शरीर पूरी तरह स्वस्थ है या किसी बीमारी से लड़ रहा है. ऐसे में अगर आपके पेशाब का रंग अचानक एकदम दूधिया या सफेद दिखाई देने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है और यह किन बीमारियों का संकेत हो सकता है.

क्या होती है दिक्कत?

अगर सुबह उठते ही पेशाब का रंग सामान्य पीले की बजाय एकदम सफेद या दूधिया नजर आए, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. कई लोग इसे मामूली बदलाव समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह शरीर के अंदर होने वाली गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है. डॉक्टर इस स्थिति को काइल्यूरिया कहते हैं, जिसमें पेशाब के साथ एक खास तरह का दूधिया तरल पदार्थ मिलने लगता है.

क्या होता है ऐसा?

Fortis Healthcare की एक रिपोर्ट के अनुसार, हमारा शरीर भोजन में मौजूद वसा को पचाने के बाद एक सफेद रंग का तरल पदार्थ बनाता है, जिसे काइल ( कहा जाता है. यह सामान्य रूप से लसीका सिस्टम के जरिए ब्लड तक पहुंचता है. लेकिन जब किसी कारण से लसीका वेसल्स में रुकावट या क्षति आ जाती है, तो यह लिक्विड पेशाब की नली में मिल सकता है. इसी वजह से पेशाब का रंग दूध जैसा सफेद दिखाई देने लगता है.

दूधिया यूरिन का सबसे बड़ा संकेत इसका असामान्य सफेद रंग होता है. कई लोगों में यह समस्या ज्यादा तैलीय या वसा वाले भोजन के बाद अधिक दिखाई देती है. कुछ मरीजों को कमर के निचले हिस्से में हल्का दर्द भी महसूस हो सकता है. अगर पेशाब के साथ खून आए, पेशाब करने में परेशानी हो या बार-बार ऐसा हो रहा हो, तो बिना देर किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.

क्या होता है इसके पीछे कारण?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत समेत कई उष्णकटिबंधीय देशों में इसका एक प्रमुख कारण फाइलेरिया इंफेक्शन हो सकता है. मच्छर के काटने से शरीर में पहुंचने वाले परजीवी लसीका वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं. इसके कारण उनमें रुकावट पैदा होती है और दबाव बढ़ने पर काइल पेशाब में मिलने लगता है. हालांकि, हर मामले में इसकी वजह इंफेक्शन ही नहीं होती.

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इन कारणों की वजह से भी हो सकती है दिक्कत

कुछ लोगों में पेट या पेल्विक हिस्से में चोट लगने, ट्यूमर, जन्मजात लसीका सिस्टम की गड़बड़ी या अन्य बीमारियों के कारण भी यह समस्या हो सकती है. इसलिए केवल लक्षण देखकर कारण तय नहीं किया जा सकता. सही वजह जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी होती है. इस समस्या की पुष्टि के लिए डॉक्टर सबसे पहले यूरिन टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई या अन्य जांच भी कराई जा सकती हैं, ताकि यह पता चल सके कि लसीका द्रव कहां से लीक हो रहा है. जांच की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे का इलाज तय किया जाता है.

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