Persistent-Nagarro Deal: यूरोप के बाजार पर भारतीय कंपनी का कब्जा! $2.9 बिलियन के इस AI मर्जर के मायने समझिए

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  • पुणे की परसिस्टेंट सिस्टम्स जर्मन नागरो एसई खरीदेगी.
  • सौदे को नागरो के बड़े शेयरहोल्डर ने मंजूरी दी.
  • विलय से कंपनी का 2.9 अरब डॉलर का राजस्व होगा.
  • यूरोपीय बाजार में परसिस्टेंट की पकड़ मजबूत होगी.

Persistent Systems to accquire Nagarro: पुणे में हेडक्वार्टर वाली टेक कंपनी परसिस्टेंट सिस्टम्स (Persistent Systems) जर्मन आईटी कंपनी नागरो (Nagarro SE) का अधिग्रहण करने जा रही है. यह इतिहास के सबसे बड़े विदेशी सौदों में एक होगा.

कंपनी ने बीते 27 जून को बताया कि  वह अपनी सब्सिडियरी ‘गैलेक्सी जर्मनी होल्डिंग’ के जरिए जर्मन डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म ‘नगरो SE’ के सभी बकाया शेयर नकद में 81 यूरो प्रति शेयर के भाव पर खरीदने के लिए वॉलंटरी पब्लिक टेकओवर करेगी. यह कहमत नागरो के 25 जून 2026के क्लोजिंग शेयर प्राइस से 140% अधिक प्रीमियम को दर्शाता है. इस डील के Q4CY26 या Q1CY27 तक पूरी होने की उम्मीद है.

सबसे बड़े शेयरहोल्डर से मिली मंजूरी

Persistent को पहले ही Nagarro के सबसे बड़े शेयरहोल्डर- Lantano Beteiligungen GmbH से इस ‘बिजनेस कॉम्बिनेशन एग्रीमेंट’ के लिए समर्थन मिल चुका है. इसने कंपनी में अपनी पूरी 21% हिस्सेदारी बेचने के लिए सहमति दे दी है. Nagarro के मैनेजमेंट और सुपरवाइजरी बोर्ड ने भी इस डील का समर्थन किया है और वे शेयरहोल्डर्स को इस ऑफर को स्वीकार करने की सलाह देने का इरादा रखते हैं, जो कि फाइनल ऑफर डॉक्यूमेंट की समीक्षा के अधीन है.

मर्जर के बाद क्या होगा?

Persistent Systems और Nagarro SE के विलय के बाद यह एक ऐसी मजबूत कंपनी बनेगी, जिसके पास 40 से अधिक देशों में 46000 से अधिक कर्मचारी होंगे. इनमें से लगभग 37000 कर्मचारी अकेले भारत में होंगे. बाकी 3500 उत्तरी अमेरिका और 3000 यूरोप में होंगे. ये दोनों मिलकर एक ऐसी ग्लोबल एआई- बेस्ड डिजिटल इंजीनियरिंग कंपनी बनेगी, जिसका सालाना रेवेन्यू 2.9 अरब डॉलर (24000 करोड़ रुपये से अधिक) बैठेगा. इस डील के बाद कंपनी के पास 350 से अधिक बड़े क्लाइंट्स होंगे. इससे उनका टोटल एड्रेसेबल मार्केट (TAM) बढ़कर 1400 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा. 

यूरोपीय बाजार में भारतीय कंपनी का दबदबा

डील के बाद परसिस्टेंट का यूरोपीय बाजार से आने वाला रेवेन्यू 9% से बढ़कर सीधे 22% हो जाएगा. इससे कंपनी को यूरोप (खासकर जर्मनी में) में मजबूत पकड़ मिलेगी. इन दोनों ही कंपनियों का फोकस एआई-बेस्ड डिजिटल इंजीनियरिंग,क्लाउड, ERP और कस्टमर एक्सपीरियंस को वैश्विक स्तर पर डिलीवर करना है.

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