- उपग्रह निर्माण सीखा, दिल्ली में छात्रों संग बनाएंगी चंद्रमा हेतु सैटेलाइट.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से महिमा राजपूत ने अपने राज्य के साथ-साथ देश का नाम भी रोशन किया है. 10वीं क्लास की छात्रा महिमा राजपूत का चयन इंटरनेशनल स्पेस मिशन ‘ShakthiSAT’ के लिए किया गया है. इस मिशन में दुनिया के 108 देशों के छात्र शामिल हो रहे हैं. महिमा की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार और स्कूल बल्कि पूरे प्रदेश को एक नई पहचान दी है. इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर के विज्ञान कार्यक्रम तक पहुंचना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है.
स्कूल प्रिंसिपल के माध्यम से जानकारी
महिमा ने बताया कि उन्हें इस मिशन के बारे में उनके स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया था जिसके बाद उनकी गाइडेंस टीचर योगेश्वरी लहिरी ने उनका रजिस्ट्रेशन कराया और रजिस्ट्रेशन के बाद उन्होंने कई तरह की गतिविधियों और ट्रेनिंग कार्यक्रमों में भाग लिया. इस प्रक्रिया का उद्देश्य छात्रों की वैज्ञानिक समझ और उनकी तकनीकी क्षमता को मजबूत करना था. महिमा ने बताया कि शुरुआत में उन्हें विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े कई डिजिटल मॉड्यूल दिए गए, जिन्हें पूरा करने के बाद उनकी समझ और रुचि दोनों में बढ़ोतरी हुई. इसी मेहनत ने उन्हें इस स्तर तक पहुंचने में मदद की.
मजबूत किए साइंस के बेसिक कॉन्सेप्ट
महिमा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान कुल 21 मॉड्यूल और 365 लेशन उपलब्ध कराए गए. इनके जरिए छात्रों को विज्ञान, सैटेलाइट तकनीक और अंतरिक्ष से जुडी बातें समझाई गई. उन्होंने बताया की इसका उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना नहीं था बल्कि छात्रों को व्यवहारिक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए तैयार करना भी था. महिमा का कहना है कि इन मॉड्यूल ने उनकी बेसिक साइंस समझ को काफी बेहतर बनाया.
सैटेलाइट बनाने की ट्रेनिंग भी कार्यक्रम का हिस्सा
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि छात्रों को केवल थ्योरी तक सीमित नहीं रखा गया. उन्हें सैटेलाइट निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई. महिमा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान यह समझाया गया कि एक सैटेलाइट कैसे तैयार होती है, उसका डिजाइन कैसे बनाया जाता है और उसे मिशन के उद्देश्य के अनुसार कैसे विकसित किया जाता है. इस अनुभव ने छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान को किताबों से बाहर समझने का मौका दिया.
108 देशों के छात्रों के साथ काम करेंगी महिमा
महिमा ने जानकारी दी की 23 अगस्त को उनको दिल्ली के लिए रवाना होना है, जहां पर वह 108 छात्रों के साथ मिलकर एक उपग्रह बनायेंगे जो चंद्रमा की सतह पर उतरेगा और दूसरा उपग्रह चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा करेगा.
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