पीरियड के दौरान पेट दर्द, मूड में बदलाव, थकान या कभी-कभी पीरियड की तारीख में थोड़ा बदलाव सामान्य हो सकता है. हालांकि, हर परेशानी को सिर्फ हार्मोनल समस्या मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं होता. अगर पीरियड में लगातार असामान्य बदलाव, बहुत ज्यादा दर्द या अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा है तो इसके पीछे किसी स्वास्थ्य समस्या की वजह भी हो सकती है. ऐसे लक्षणों को समझना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहज जरूरी है.
बहुत ज्यादा ब्लीडिंग को न करें नजरअंदाज
अगर पीरियड के दौरान सामान्य से काफी ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है, बार-बार पैड बदलना पड़ रहा है या कई दिनों तक अत्यधिक ब्लीडिंग रहती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं, फाइब्रॉएड, पॉलीप या अन्य स्थितियां शामिल हो सकती हैं. लगातार ज्यादा ब्लीडिंग होने से शरीर में आयरन की कमी और एनीमिया भी हो सकता है, ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लें.
असहनीय पीरियड दर्द हो सकता है संकेत
हल्का या मध्यम दर्द कई लोगों में सामान्य हो सकता है, लेकिन ऐसा दर्द जो रोजमर्रा के काम, पढ़ाई या नौकरी को प्रभावित करे, सामान्य मानकर सहना उचित नहीं है. बहुत तेज और लगातार दर्द कभी-कभी एंडोमेट्रियोसिस, एडेनोमायोसिस या अन्य स्त्रीरोग संबंधी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है. खासकर अगर दर्द समय के साथ बढ़ रहा है या सामान्य दर्द की दवाओं से राहत नहीं मिल रही तो जांच जरूर करवाएं.
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पीरियड अनियमित होने पर दें ध्यान
कभी-कबार पीरियड जल्दी या देर से आना कई कारणों से हो सकता है. लंबे समय तक पीरियड अनियमित रहना, कई महीनों तक पीरियड न आना या बार-बार चक्र में बड़ा बदलाव होना जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है. इसके पीछे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), थायरॉयड की समस्या, वजन में बदलाव या अन्य स्वास्थ्य कारण हो सकते हैं. गर्भावस्था की संभावना होने पर सबसे पहले उसकी जांच करना भी जरूरी है.
पीरियड के साथ लगातार कमजोरी और चक्कर
अगर ज्यादा ब्लीडिंग के साथ लगातार कमजोरी, थकान, सांस फूलना या चक्कर आने जैसे लक्षण हैं तो शरीर में आयरन की कमी या एनीमिया की आशंका हो सकती है. ऐसे लक्षणों में डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच कराना महत्वपूर्ण है. पीरियड से जुड़ी परेशानियों के पीछे हार्मोनल बदलाव एक कारण हो सकता है, लेकिन यही एकमात्र कारण नहीं होता है. लक्षणों की अवधि और गंभीरता पर ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर स्त्रीरोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है.
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