4 साल की BSc डिग्री करने वाले छात्रों के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है. अब 4 साल BSc (ऑनर्स) से बीएससी (ऑनर्स विद रिसर्च) करने वाले कुछ चुनिंदा एमई और एमटेक प्रोग्राम में एडमिशन ले सकेंगे. ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) ने इस दिशा में रास्ता साफ कर दिया है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर BSc ग्रेजुएट किसी भी एमटेक कोर्स में एडमिशन ले सकेगा. यह सुविधा सिर्फ संबंधित और आपस में जुड़े विषयों और उन्हीं विशेषज्ञाताओं के लिए होगी, जिनमें MSc डिग्री वाले उम्मीदवार पहले से एडमिशन के योग्य है.
4 साल की BSc डिग्री वालों को मिलेगा मौका
यह बदलाव खासतौर पर 4 वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के तहत पढ़ाई करने वाले साइंस छात्रों के लिए जरूरी है. UGC की ओर से मार्च 2025 में जारी नियमों में 4 वर्षीय अंडरग्रेजुएट डिग्री (ऑनर्स और ऑनर्स विद रिसर्च) को लेवल 7 के दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम में ME और MTech के लिए पात्रता में शामिल किया गया था. नियमों के अनुसार फिजिक्स, बायोलॉजी और मैथमेटिक्स जैसे संबंधित विषय में 4 साल की BSc डिग्री करने वाले छात्र आगे MTech जैसे कोर्स का ऑप्शन चुन सकेंगे. हालांकि AICTE के अनुसार यह रास्ता केवल उन्हें विषय में उपलब्ध होगा, जो उम्मीदवार की BSc पढ़ाई से संबंधित और करीबी रूप से जुड़े हो.
हर एमटेक कोर्स में नहीं मिलेगा एडमिशन
AICTE की नई व्यवस्था में सभी बीएससी छात्रों के लिए एमटेक में सीधे एडमिशन की अनुमति के तौर पर नहीं देखा जा सकता. 4 वर्षीय BSc डिग्री वाले उम्मीदवार को केवल संबंधित और क्लाॅजली अलाइंड डिसिप्लिन स्पेशलाइजेशन में ही एडमिशन के लिए विचार किया जाएगा. इसके अलावा वे संस्थान और कोर्स भी इस व्यवस्था के दायरे में होंगे, जहां MSc वाले उम्मीदवारों को पहले से पात्र माना जाता है.
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UG के छात्रों के सामने क्यों आया था संकट?
4 वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के तहत साइंस की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए एमटेक में एडमिशन का मुद्दा इसलिए जरूरी बना, क्योंकि UGC के नियमों में पात्रता का प्रावधान होने के बावजूद सभी तकनीकी संस्थानों में इसे एक समान तरीके से लागू नहीं किया जा रहा था. कुछ इंजीनियरिंग संस्थानों ने चार वर्षीय BSc छात्रों के एमटेक आवेदन स्वीकार किए, जबकि कुछ संस्थानों में बीटेक और बीई डिग्री वालों को ही एलिजिबल माना गया. दिल्ली के दिल्ली टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी और नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी को लेकर भी छात्रों ने ऐसी दिक्कतें सामने रखी थी. इससे यूजी प्रोग्राम के तहत 4 साल की BSc करने वालों के सामने आगे की पढ़ाई को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी.
UGC एक्ट के नियमों को लेकर भी था भ्रम
पूरे मामले में मुख्य समस्या यूजीसी और AICTE के नियमों के बीच तालमेल को लेकर सामने आई. UGC ने मार्च 2025 में जारी अपने नियमों में 4 वर्षीय BSc (ऑनर्स-ऑनर्स विद रिसर्च) को संबंधित एमटेक प्रोग्राम के लिए योग्य माना था. वहीं तकनीकी संस्थानों में इसके आधार पर एडमिशन को लेकर अलग-अलग तरीके से नियमों की व्याख्या की जा रही थी. इसी को लेकर इंडियन नेशनल टीचर्स कांग्रेस ने AICTE को पत्र लिखकर नियमों में स्पष्टता और सभी AICTE से मान्यता प्राप्त संस्थानों में एक समान व्यवस्था लागू करने की मांग की थी. शिक्षकों की संस्था का कहना था कि नियमों के बावजूद कई चार वर्षीय बीएससी करने वाले छात्रों को एमटेक में एडमिशन नहीं दे रहे हैं, जिसे बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हो रहे हैं.
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