- बिलीबिली, चीन का प्रमुख वीडियो मंच, अब वैश्विक विस्तार कर रहा है.
- क्रिएटर्स को प्रति 1000 व्यूज पर 0.70 डॉलर भुगतान का दावा.
- भुगतान व्यूज, दर्शक जुड़ाव, वीडियो लंबाई जैसे कारकों पर निर्भर.
- मॉनेटाइजेशन को 100 सब्सक्राइबर, 2000 व्यूज और नियम पालन चाहिए.
वीडियो स्ट्रीमिंग की दुनिया में अब ‘बिलीबिली’ (Bilibili) जलवा बिखेरने आ रहा है. यह चीन का एक बहुत बड़ा वीडियो शेयरिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है. इसे आप चीन का YouTube मान सकते हैं. चूंकि चीन में यूट्यूब पर बैन लगा है इसलिए वहां लोग वीडियो देखने और शेयर करने के लिए इसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. घरेलू बाजार में पैर पसारने के बाद अब Bilibili ग्लोबल मार्केट में अपना दायरा बढ़ा रहा है.
व्यूज के अलावा भी इन चीजों का रखा जाएगा ध्यान
X पर RT की एक पोस्ट के मुताबिक, Bilibili कथित तौर पर क्रिएटर्स को हर 1,000 व्यूज के लिए लगभग 0.70 डॉलर (करीब 60 रुपये) का भुगतान कर रहा है. इस एक बात ने दुनिया भर के क्रिएटर्स का ध्यान खींचा है. यानी कि अब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में YouTube को टक्कर देने के लिए एक नया खिलाड़ी आ गया है. हालांकि, कंपनी के तरफ से अभी व्यूज के बदले दी जाने वाली राशि को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
सिर्फ व्यूज ही काफी नहीं
Bilibili ने कहा है कि व्यूज के बदले कमाई ऑडियंस की लोकेशन, एडवरटाइजर की डिमांड, कंटेंट की कैटेगरी और मॉनेटाइजेशन प्रोडक्ट्स जैसे कई और फैक्टर्स पर निर्भर करेगी. Bilibili में कमाई सिर्फ व्यूज के जरिए नहीं होती है. इनका सिस्टम व्यूज के साथ-साथ वीडियो की लंबाई, ऑडियंस रिटेंशन (लोग कितनी देर वीडियो देख रहे हैं) और यूजर्स के इंगेजमेंट (लाइक्स, कमेंट्स, शेयर्स और कॉइन्स) को मिलाकर एक स्कोर तैयार करता है, जिसके आधार पर फाइनल पेमेंट होता है.
Bilibili के क्रिएटर प्रोग्राम की पॉलिसी के अनुसार, मॉनेटाइजेशन के लिए अप्लाई करने से पहले क्रिएटर्स के पास कम से कम 100 सब्सक्राइबर्स और 2,000 वैलिड पब्लिक व्यूज होने चाहिए. इसके अलावा, कंपनी चैनल की ओरिजिनैलिटी, कॉपीराइट नियमों का पालन, कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन जैसी चीजों की भी समीक्षा करती है.
Bilibili का दुनिया में बढ़ रहा क्रेज
बिलीबिली के इस समय 37.6 करोड़ (376 मिलियन) से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं, जिनमें से ज्यादा चीनी युवा हैं. बिलीबिली इस वक्त अमेरिका, यूके, जापान सहित इंडोनेशिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में उपलब्ध है. हालांकि, भारत में यह ऐप अभी आधिकारिक तौर पर लॉन्च नहीं हुआ है.
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