होर्मुज से तेल-गैस की सप्लाई पर बड़ा अपडेट, ईरान-ओमान ने दी राहत

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होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ी राहत की खबर सामने आई है. ईरान और ओमान ने इस समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू करने के लिए एक अस्थायी व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार किया है. ईरान और ओमान के बीच बातचीत से होर्मुज के दोबारा खुलने की उम्मीद नजर आने लगी है. आइये जानते हैं इस प्रस्ताव का तेल और गैस सप्लाई पर क्या असर पड़ने वाला है.

ईरान और ओमान ने क्या रखा प्रस्ताव?
ईरान और ओमान ने होर्मुज में अस्थायी संयुक्त नेविगेशन कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा है. इसका मकसद समुद्री रास्ते से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को फिर से शुरू करना है. दोनों देशों के बीच इस प्रस्ताव पर काम करने को लेकर बातचीत हो रही है. इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए संयुक्त अभियान भी चलाए जाने का प्लान है.

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क्या पूरी तरह खुल रहा है होर्मुज?
ईरान और ओमान का प्लान वैसे तो केवल अस्थायी रास्ता खोलने का नहीं है. दोनों देश आगे स्थायी शिपिंग कॉरिडोर और जलडमरूमध्य को लेकर और भी बातचीत करेंगे. इसमें जहाजों की आवाजाही का प्रबंधन, सूचनाओं का आदान-प्रदान और नेविगेशन और सुरक्षा सेवाओं जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. हालांकि, अभी इसे होर्मुज के पूरी तरह नॉर्मल होने का ऐलान नहीं माना जा सकता है. 

सप्लाई कैसे रोक रहा है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे जरूरी रास्तों में से एक है. यहां से तेल और गैस की बड़ी मात्रा समुद्री रास्ते से गुजरती है. ऐसे में इस रास्ते पर लंबे समय तक आवाजाही बाधित रहने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ सकता है. अभी भी यहां जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी नीचे है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को सिर्फ पांच कमोडिटी जहाजों ने होर्मुज पार किया है, जबकि पिछले 10 दिनों में करीब 15 जहाज प्रतिदिन निकलते थे.

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कच्चा तेल क्यों हुआ सस्ता?

ईरान और ओमान के बीच बातचीत से होर्मुज के दोबारा खुलने की उम्मीद बढ़ी है, जिसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला है. बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है और तेल की कीमतों में गिरावट भी आई है. अगर होर्मुज से तेल और गैस की आवाजाही धीरे-धीरे नॉर्मल होती है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए ये राहत की खबर हो सकती है. 



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