- NTA में दो नए निदेशक और एक संयुक्त निदेशक नियुक्त।
- यह नियुक्तियां परीक्षा विवादों के बाद एजेंसी सुधारने हेतु।
- एजेंसी में 20 अन्य पदों पर भी भर्ती होगी।
- नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच अभी भी जारी।
NTA Appointments: केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को मजबूत और पुनर्गठित करने की कोशिश के तहत दो डायरेक्टर और एक जॉइंट डायरेक्टर नियुक्त किए हैं. यह आदेश 27 अगस्त को जारी किया गया था और नियुक्तियों की जानकारी आज सामने आई है. यह कदम एनटीए की लगातार हो रही जांच और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद के बाद एजेंसी में सुधार लाने की सरकार की कोशिश के बीच उठाया गया है.
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में नई नियुक्तियां
आईपीएस अधिकारी रवि कुमार सिंह और आईएएस अधिकारी प्रसन्ना वेंकटेश वी को डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. इसी के साथ 2016 बैच के आईआरएस अधिकारी अमित सामदारिया को जॉइंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है.
तीनों अधिकारियों को आदेश जारी होने के तीन हफ्तों के अंदर अपना पद संभालने का निर्देश दिया गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि तय समय में शामिल न होने पर अधिकारियों को सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.
नए नियुक्त अधिकारी कौन हैं?
आईपीएस अधिकारी रवि कुमार सिंह को 5 साल के कार्यकाल के लिए एनटीए का डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. आईएएस अधिकारी प्रसन्ना वेंकटेश वी को भी 5 साल के कार्यकाल के लिए डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. वहीं 2016 बैच के आईआरएस अधिकारी अमित सामदरिया 4 साल के कार्यकाल के लिए जॉइंट डायरेक्टर के तौर पर काम करेंगे. इन नियुक्तियों को टेस्टिंग एजेंसी के प्रशासनिक ढांचा को मजबूत करने की सरकार की व्यापक कोशिश के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है.

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी सुधारों के तहत और भर्तियां
पुनर्गठन की प्रक्रिया सिर्फ वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों तक ही सीमित नहीं है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 4 जनरल मैनेजर और 16 यंग प्रोफेशनल पदों के लिए भी भर्ती की घोषणा की है. इन पदों के लिए यूपीएससी पोर्टल के जरिए आवेदन मांगे गए हैं. इस अतिरिक्त भर्ती का मकसद एजेंसी कि संस्थागत और प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करना है.
इससे पहले 47 अधिकारियों को हटाया गया
यह नई युक्तियां एनटीए अधिकारियों के खिलाफ पहले की गई बड़ी कार्रवाई के बाद हुई हैं. 25 जुलाई को एजेंसी ने नीट पेपर लीक मामले में 47 अधिकारियों को हटा दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक हटाए गए अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज किए जाएंगे. यह कार्रवाई परीक्षा से जुड़े विवाद और अनियमितताओं के आरोपों पर संस्थागत प्रतिक्रिया का हिस्सा थी.

नीट पेपर लीक मामला क्या है?
यह विवाद 3 मई 2026 को हुई नीट यूजी 2026 परीक्षा के प्रश्न पत्र के लीक से जुड़ा है. विवाद के बाद सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने परीक्षा रद्द कर दी और दोबारा परीक्षा आयोजित की.
इस मुद्दे ने छात्रों में भारी आक्रोश को पैदा किया और जवाबदेही के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए. इस विवाद का देश भर के छात्रों पर काफी गंभीर असर पड़ा. इस दौरान आत्महत्या से कई छात्रों की मौत की खबर भी सामने आई.
विरोध प्रदर्शन हफ्तों तक जारी रहे. इसमें दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन भी शामिल थे. कॉकरोच जनता पार्टी ने एक महीने तक विरोध प्रदर्शन किया और सोनम वांगचुक ने 26 दिन की भूख हड़ताल की. इस विरोध प्रदर्शन के नतीजे भी सामने आए. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया.
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सीबीआई की जांच जारी
सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन फिलहाल पेपर लीक की जांच कर रही है. महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली सहित कई राज्यों में जांच की जा रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि जांचकर्ता लीक से जुड़े व्यापक नेटवर्क और परिस्थिति की पड़ताल कर रहे हैं. अब तक इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी सीबीआई जल्द ही चार्ज शीट दाखिल कर सकती है.
नेशनल टेस्टिस एजेंसी का पुनर्गठन क्यों जरूरी है?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी कई प्रमुख प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाओं को आयोजित करता है. इस वजह से भारत भर के शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेने के इच्छुक लाखों छात्रों के लिए इसका कामकाज काफी जरूरी है.
दो डायरेक्टर और एक जॉइंट डायरेक्ट की हालिया नियुक्ति के साथ-साथ जनरल मैनेजर और युवा पेशेवर की प्रस्तावित भर्ती एजेंसी को प्रशासनिक रूप से काफी ज्यादा मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
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