खाने-पीने की चीजों में मिलावट और ग्राहकों को गुमराह करने वाले उत्पादों के खिलाफ हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने मानकों पर खरा नहीं उतरने वाले उत्पादों को घी के नाम से बनाने, बेचने, स्टोर करने और सप्लाई करने पर एक साल के लिए रोक लगा दी है. ये आदेश पूरे हरियाणा में लागू हुआ है.
सरकार का ये फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है. इस आदेश में बाजार में घी के नाम से बिकने वाले गलत उत्पादों पर रोक लगाया गया है.
किन पर लागू होगी रोक?
हरियाणा सरकार के आदेश के अनुसार, कोई भी ऐसा उत्पाद जिसे घी के नाम से बेचा या प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन वो निर्धारित संरचना और गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करता, उसकी बिक्री और वितरण पर रोक रहेगी. खास तौर पर घी फॉर पूजा, घी फॉर दीया, वनष्पति घी, कुकिंग घी, टेबल घी और घी फॉर हवन जैसे नामों से बेचे जाने वाले उत्पाद भी इस आदेश के दायरे में हैं. इन्हें घी के नाम से बाजार में नहीं बेचा जा सकता है.
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असली घी पर भी रोक?
सरकार के इस फैसले का मतलब ये नहीं है कि हर तरह के घी की बिक्री पर रोक लगा दिया गया है. जो घी खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा करता है उसकी बिक्री तो जारी रहेगी. आदेश में ये साफ किया गया है कि असली घी पर बैन नहीं है.
कबसे लागू है आदेश?
ये प्रतिबंध 21 अगस्त 2026 से अगले एक साल के लिए लागू किया गया है. यानी अगर आदेश को वापस नहीं लिया जाता है तो अगले साल, अगस्त 2027 तक ये बैन ही रहने वाला है. हरियाणा के खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. मनोज कुमार की ओर से जारी आदेश में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a) का इस्तेमाल किया गया है.
पनीर- मक्खन पर भी सख्ती?
घी के साथ-साथ हरियाणा सरकार ने एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर और मार्जरीन को मक्खन के नाम से बेचने पर भी एक साल की रोक लगाई है. एनालॉग पनीर में आम पनीर की तरह दिखने और इस्तेमाल होने वाले उत्पाद शामिल होते हैं, लेकिन इनमें दूध की वसा की जगह पूरी तरह या आंशिक रूप से वेजिटेबल ऑयल, वेजिटेबल फैट वाली चीजें इस्तेमाल की जाती हैं.
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किनपर पड़ेगा असर?
सरकार के इस फैसले का असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग यूनिट, ईटरी और क्लाउड किचन जैसे कारोबारों पर भी पड़ने वाला है. इन्हें ऐसे नॉन-डेयरी या एनालॉग पनीर का इस्तेमाल, स्टोरेज या बिक्री करने से रोक दिया गया है. सरकार का जोर इस बात पर है कि ग्राहक को जो चीज जिस नाम से बेची जा रही है, वो सही हो.