कमाई के मामले में दिल्ली देश में नंबर 1, केंद्र से नहीं मांगनी पड़ती मदद

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Delhi News: दिल्ली सिर्फ राजनीति और कारोबार का केंद्र ही नहीं है, बल्कि राज्यों की वित्तीय स्थिति के मामले में भी काफी मजबूत है. वित्त वर्ष 2024-25 के बजट अनुमानों के अनुसार दिल्ली देश में सबसे ज्यादा अपने स्रोतों से टैक्स जुटाने वाले राज्यों में सबसे आगे है. दिल्ली के टोटल टैक्स में उसके अपने स्रोतों से आने वाले टैक्स की हिस्सेदारी करीब 91.6 फीसदी है.

इसका मतलब है कि दिल्ली सरकार की आय का बहुत बड़ा हिस्सा राज्य के अपने टैक्स और गैर-टैक्स से आ जाता है. उसे अपने खर्च और विकास योजनाओं के लिए दूसरे राज्यों के मुकाबले में केंद्र से मिलने वाले पैसों पर कम निर्भर रहना पड़ता है. 

दिल्ली कैसे है सबसे आगे?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, FY25 के बजट अनुमानों में दिल्ली के टोटल टैक्स में स्वयं का स्रोत टैक्स की हिस्सेदारी 91.6 फीसदी है. ये देश के सभी राज्यों में सबसे ज्यादा है, नंबर 1 पर ही है. स्वयं का स्रोत टैक्स में खास तौर से सरकार द्वारा अपने स्तर पर जुटाया गया टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू शामिल होता है. यानी राज्य को अपनी आय के लिए दूसरे स्रोतों से मिलने वाले फंड पर ज्यादा निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती है. दिल्ली की मजबूत टैक्स स्थिति के पीछे राजधानी का बड़ा बाजार, कारोबार, रियल एस्टेट और दूसरे इनकम सोर्स हैं.

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गुजरात- महाराष्ट्र का क्या है हाल?
अपने स्रोतों से टैक्स जुटाने के मामले में दिल्ली के बाद कुछ बड़े और औद्योगिक राज्य भी मजबूत स्थिति में हैं. FY25 के बजट अनुमानों के अनुसार गुजरात के टोटल टैक्स में अपने स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 85.5 फीसदी, जबकि महाराष्ट्र में ये करीब 85 फीसदी है. इसके बाद हरियाणा और कर्नाटक का नंबर आता है.

दिल्ली की कमाई कैसे होती है?
दिल्ली के पास देश के सबसे बड़े शहरी और बाजारों में से एक है. यहां बड़ी संख्या में कारोबारी प्रतिष्ठान, सर्विस सेक्टर की कंपनियां, रिटेल कारोबार और दूसरी आर्थिक इनकम के सोर्स मौजूद हैं. इसके अलावा दिल्ली में टैक्स जुटाने का आधार भी काफी माध्यम हैं. वैट/जीएसटी टैक्स, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन, आबकारी शुल्क और मोटर वाहन से जुड़े टैक्स जैसे स्रोत सरकार के अपने टैक्स में योगदान करते हैं. दिल्ली की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर का बड़ा योगदान होता है. 

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केंद्र के पैसे का क्या होता है?
राज्यों की टोटल कमाई को समझने के लिए स्वयं का स्रोत टैक्स और केंद्रीय हस्तांतरण के बीच अंतर समझना जरूरी है. स्वयं का स्रोत टैक्स वो पैसा है जो राज्य सरकार अपने टैक्स और गैर-टैक्स स्रोतों से जुटाती है. इसके अलावा केंद्रीय टैक्स में राज्य का हिस्सा और केंद्र से मिलने वाले हस्तांतरण के तहत आते हैं. जिस राज्य के टोटल टैक्स में स्वयं का स्रोत टैक्स की हिस्सेदारी ज्यादा होती है, वो आम तौर पर बाहरी मदद पर कम निर्भर होता है.



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