चेस मास्टर बनने के साथ पढ़ाई को कैसे मैनेज करते हैं प्रज्ञानानंद?


 इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई को छोड़ा नहीं और स्कूल के सहयोग से शिक्षा और शतरंज दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ें.  ही हाल ही में प्रज्ञानानंद ने ग्रैंड चेस टूर का खिताब जीतकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की. वह यह खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनें. फाइनल में उन्होंने अमेरिका के फैबियानो करूआना को 15-13 से हरा दिया.

 इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई को छोड़ा नहीं और स्कूल के सहयोग से शिक्षा और शतरंज दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ें.  ही हाल ही में प्रज्ञानानंद ने ग्रैंड चेस टूर का खिताब जीतकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की. वह यह खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनें. फाइनल में उन्होंने अमेरिका के फैबियानो करूआना को 15-13 से हरा दिया.

वहीं आपको बता दे कि प्रज्ञानानंद चेन्नई के वेलाम्मल स्कूल में पढ़े हैं. यह स्कूल कई बेहतरीन शतरंज खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए जाना जाता है. कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंद की भागीदारी बढ़ने लगी थी, ऐसे में सामान्य स्कूली दिनों के साथ पढ़ाई जारी रखना उनके लिए आसान नहीं था.

वहीं आपको बता दे कि प्रज्ञानानंद चेन्नई के वेलाम्मल स्कूल में पढ़े हैं. यह स्कूल कई बेहतरीन शतरंज खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए जाना जाता है. कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में प्रज्ञानानंद की भागीदारी बढ़ने लगी थी, ऐसे में सामान्य स्कूली दिनों के साथ पढ़ाई जारी रखना उनके लिए आसान नहीं था.

ऐसे समय में स्कूल ने उनके टूर्नामेंट शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए पढ़ाई में सहयोग किया. जिन विषयों में उन्हें अतिरिक्त मदद की जरूरत होती थी, वहां शिक्षकों ने व्यक्तिगत रूप से उनकी सहायता की. इस तरह टूर्नामेंट के लिए लगातार बाहर रहने के बावजूद उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो इसका ध्यान रखा गया.

ऐसे समय में स्कूल ने उनके टूर्नामेंट शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए पढ़ाई में सहयोग किया. जिन विषयों में उन्हें अतिरिक्त मदद की जरूरत होती थी, वहां शिक्षकों ने व्यक्तिगत रूप से उनकी सहायता की. इस तरह टूर्नामेंट के लिए लगातार बाहर रहने के बावजूद उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो इसका ध्यान रखा गया.

प्रज्ञानानंद की पढ़ाई के सफर में बोर्ड परीक्षाएं भी एक अहम पड़ाव रही है. शतरंज के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में व्यस्त रहने के बावजूद उन्होंने चेन्नई स्थित वेलाम्मल में स्कूल से कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं की परीक्षाएं पूरी की. उनकी मां के अनुसार परिवार और स्कूल ने उनके टूर्नामेंट शेड्यूल के हिसाब से पढ़ाई को व्यवस्थित किया. इससे वह शतरंज की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के साथ अपनी स्कूली शिक्षा भी जारी रख सकें.

प्रज्ञानानंद की पढ़ाई के सफर में बोर्ड परीक्षाएं भी एक अहम पड़ाव रही है. शतरंज के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में व्यस्त रहने के बावजूद उन्होंने चेन्नई स्थित वेलाम्मल में स्कूल से कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं की परीक्षाएं पूरी की. उनकी मां के अनुसार परिवार और स्कूल ने उनके टूर्नामेंट शेड्यूल के हिसाब से पढ़ाई को व्यवस्थित किया. इससे वह शतरंज की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के साथ अपनी स्कूली शिक्षा भी जारी रख सकें.

प्रज्ञानानंद का शतरंज से जुड़ाव भी बहुत कम उम्र में शुरू हुआ. उनकी मां ने बताया कि उन्होंने करीब ढाई साल की उम्र में शतरंज सीखना शुरू किया था. शुरुआत में उन्हें लंबे समय तक अभ्यास नहीं कराया जाता था. कई बार अभ्यास का समय करीब 15 मिनट ही होता था और कोशिश रहती थी कि इसे उनके लिए मजेदार रखा जाए और किसी तरह का दबाव न हो.

प्रज्ञानानंद का शतरंज से जुड़ाव भी बहुत कम उम्र में शुरू हुआ. उनकी मां ने बताया कि उन्होंने करीब ढाई साल की उम्र में शतरंज सीखना शुरू किया था. शुरुआत में उन्हें लंबे समय तक अभ्यास नहीं कराया जाता था. कई बार अभ्यास का समय करीब 15 मिनट ही होता था और कोशिश रहती थी कि इसे उनके लिए मजेदार रखा जाए और किसी तरह का दबाव न हो.

धीरे-धीरे यही छोटी-छोटी प्रैक्टिस उनके करियर की नींव बन गई. आगे चलकर प्रज्ञानानंद उस समय दुनिया के सबसे कम उम्र के इंटरनेशनल चेस मास्टर बन और बाद में ग्रैंड मास्टर का खिताब जीता. 

धीरे-धीरे यही छोटी-छोटी प्रैक्टिस उनके करियर की नींव बन गई. आगे चलकर प्रज्ञानानंद उस समय दुनिया के सबसे कम उम्र के इंटरनेशनल चेस मास्टर बन और बाद में ग्रैंड मास्टर का खिताब जीता. 

Published at : 30 Aug 2026 09:28 AM (IST)

शिक्षा फोटो गैलरी



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *