पहले ईरान और यूएस के बीच शुरू हुए युद्ध के कारण होर्मुज ब्लॉक था, जिसकी वजह से तेल गैस की आवाजाही काफी प्रभावित हुई. भारत में इसका काफी तेजी से असर पड़ा है. अब तक भी होर्मुज संकट बरकरार है और ये आवाजाही प्रभावित ही है. इसी बीच अब भारत ने भी इसके लिए नया रास्ता खोज लिया है. अब भारत अमेरिका से LPG गैस खरीद रहा है.
2026-27 में भारत ने खरीदी अमेरिका से गैस
दरअसल हाल ही में इससे जुड़ा कुछ सरकारी डाटा सामने आया है. इसके मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में अमेरिका से भारत के पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स खासतौर से LPG के आयात में सालाना आधार पर 254 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और ये 2.60 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि इसी दौरान उसी देश से कच्चे तेल का आयात 57.5 प्रतिशत से घटकर 1.57 अरब डॉलर रह गया.
ये भी पढ़ें: पाकिस्तान में महंगाई से भुखमरी की कगार पर लोग, दूध-मीट और गेहूं थाली से गायब
अप्रैल- जून के बीच बढ़ी सप्लाई
LPG के आयात में ये बढ़ोतरी अप्रैल से जून के बीच हुई है. जब दुनियाभर में एनर्जी सप्लाई प्रभावित हो रही थी. ऐसा मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण हो रहा था. एक्सपर्ट्स की मानें तो खासकर खाड़ी क्षेत्र से होने वाली सप्लाई में रुकावटों का असर पड़ रहा है. LPG, यानी कि खाना पकाने वाली गैस, प्रोपेन और ब्यूटेन का एक मिक्स होती है. तेल मार्केटिंग कंपनियां अक्सर इन दोनों घटकों को अलग-अलग लिक्विड रूप में आयात करती हैं.
कच्चे तेल का आयात हुआ कम
ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून 2025 में अमेरिका से भारत का कच्चा तेल आयात 3.70 अरब डॉलर था, जो अप्रैल-जून 2026 में घटकर 1.57 अरब डॉलर रह गया. जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल के आयात में उतार-चढ़ाव भारतीय रिफाइनरियों की व्यावसायिक जरूरतों के कारण होता है. तो वहीं, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स खासकर लिक्विड प्रोपेन और ब्यूटेन का आयात 2025-26 की पहली तिमाही में लगभग 735 मिलियन डॉलर से बढ़कर इस साल की पहली तिमाही में 2.60 बिलियन डॉलर हो गया.
ये भी पढ़ें: देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने माफ किए 1 लाख करोड़ से ज्यादा के कर्ज, RTI में से खुलासा