पछताएगा अमेरिका…ईरान की धमकी से फिर भड़की चिंगारी, भारत के लिए कितना खतरा?

0b4b2e56ff46912ee6fbc82c821d3bb617883183130711379 original


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • अमेरिका ने ईरानी हमलों के जवाब में फिर हवाई हमले किए.
  • ईरान ने हमलों का कड़ा जवाब देने की धमकी दी, 4 की मौत.
  • पिछले सप्ताह अमेरिकी हमले, ईरान की जॉर्डन में जवाबी कार्रवाई.
  • बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, भारत पर असर.

अमेरिका ने ईरान पर फिर से हमला करना शुरू कर दिया है. मंगलवार को किए इस ताजा हमले की जानकारी अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दी. सेंटकॉम ने बताया कि ये हमले ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों पर हमले की कोशिशों के बाद किए गए हैं.

इन्हीं सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए ईरान को चेतावनी दी कि ‘सबसे बड़ा हमला’ अभी बाकी है. दूसरी तरफ ईरान की सेना (IRGC) के प्रवक्ता होसैन मोहेबी ने इस पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा है कि अमेरिका को अपने इन नए हमलों पर पछताना पड़ेगा और हमलावरों को इसकी कड़ी सजा भुगतनी होगी. ईरान ने यह भी जानकारी दी कि अमेरिकी हमलों में चार लोगों की मौत हुई है और 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनमें बच्चे भी हैं. 

अमेरिका और ईरान में फिर क्यों भड़की जंग?

अभी रविवार को अमेरिकी सेना ने जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास लारक द्वीप पर ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया, तो इस पर जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे.  

इधर ट्रंप ने अमेरिकी सेना के किए इन हमलों को यह कहते हुए सही ठहराया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (समुद्री मार्ग) में फिर से बारूदी सुरंगे (Sea Mines) बिछाने का असफल प्रयास कर रहा था. वहीं, इस पर पलटवार करते हुए अमेरिका के इन दावों को मनगढ़ंत बताया.

ईरानी मीडिया और अधिकारियों ने बताया कि अमेरिकी हमलों से आम नागरिकों को नुकसान पहुंचा है. दोनों देशों के बीच करीब एक महीने की शांति के बाद अचानक शुरू हुए इस सीधे सैन्य टकराव के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं. 

कच्चे तेल में उबाल

जैसे ही दोनों देशों के बीच मिसाइल हमलों की खबरें सामने आईं ब्रेंट क्रूड की कीमतें न सिर्फ 92 डॉलर के पार गईं, बल्कि कारोबार के दौरान यह 94 से 95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी छू चुकी हैं. जहां पिछले लगभग एक महीने से तेल की कीमतें एक सीमित दायरे में स्थिर थीं. वहीं, अब इस नए भू-राजनीतिक तनाव ने कीमतों को एक ही झटके में हाल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है.

भारत पर क्या होगा असर?

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भारत के लिए नेगेटिव है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से  भारतीय अर्थव्यवस्था, आम जनता के बजट और शेयर बाजार पर चौतरफा दबाव देखने को मिलेगा.

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा हुआ, तो घरेलू ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (HPCL, BPCL, IOCL) का रिफाइनिंग मार्जिन घट जाता है. उस पर अगर सरकार ने एक्साइज ड्यूटी नहीं घटाई, तो पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी होना तय है.

पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, तो ट्रकों की माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ जाएगा. इससे फल, सब्जियां, दूध और रोजमर्रा के राशन की कीमतें भी तुरंत बढ़ जाएगी. तेल की कीमतें बढ़ने से एलपीजी और एलएनजी (LNG) गैस का इनपुट कॉस्ट भी बढ़ेगा. अभी हाल ही में कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े हैं. अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में घरेलू रसोई गैस पर भी दबाव दिख सकता है.

ये भी पढ़ें:

अगस्त में हुई पेट्रोल-डीजल की ताबड़तोड़ बिक्री, बिन मौसम बरसात बनी वजह



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *