दुनिया की बड़ी कार कंपनियों में शामिल Volkswagen ने बड़ा कॉस्ट-कटिंग प्लान मंजूर किया है. कंपनी के बोर्ड ने करीब 50000 नौकरियों में कटौती की योजना को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही जर्मनी में मौजूद चार बड़े प्लांट्स में गाड़ी प्रोडक्शन बंद करने की तैयारी है. यानी कि कंपनी के मौजूदा पुनर्गठन के तहत टोटल 1 लाख पद कम किए जाएंगे.
क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला?
फॉक्सवैगन इस समय कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है. खासकर चीन के बाजार में सस्ती कार बनाने वाली कंपनियों से उसे कड़ा कॉम्पोटिशन मिल रहा है. इसके अलावा अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ और यूरोप में प्रोडक्शन कैपेसिटी जरूरत से ज्यादा होना भी कंपनी के लिए परेशानी बढ़ा रहा है. इन्हीं चुनौतियों के बीच कंपनी ने लागत कम करने और अपने कारोबार को और बड़ा बनाने के लिए ये बड़ा फैसला लिया है.
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चार जर्मन प्लांट्स पर संकट
कंपनी के नए प्लान में जर्मनी के चार प्लांट्स में गाड़ियों के प्रोडक्शन को बंद करने की बात है. इनमें एम्डेन, ज्विकाउ, हनोवर और नेकार्सुल्म शामिल हैं. फॉक्सवैगन यूरोप में अपनी प्रोडक्शन क्षमता को भी कम करना चाहती है.
कारों के मॉडल भी होंगे कम
नौकरियों और प्लांट्स में बदलाव के साथ कंपनी अपने मॉडल लाइनअप को भी छोटा करने की तैयारी में है. फॉक्सवैगन का प्लान अपने कार मॉडल्स की संख्या को करीब आधा करने की है. इसका मकसद कम लेकिन ज्यादा बिकने वाले मॉडल्स पर फोकस करना और उत्पादन लागत घटाना है.
बता दें कि फॉक्सवैगन का ये प्लान कंपनी के इतिहास के सबसे बड़े बदलावों में से एक माना जा रहा है. नए प्लान के तहत कंपनी लागत घटाने, उत्पादन को अधिक कुशल बनाने और बदलते वैश्विक ऑटो मार्केट में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है.
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पहले कब हुई थी छंटनी?
ये पहली बार नहीं है जब फॉक्सवैगन ने बड़े पैमाने पर नौकरी घटाने का फैसला लिया है. इससे पहले कंपनी ने 50000 नौकरियों में कटौती पर सहमति बनाई थी. अब नई 50000 कटौती को जोड़ने पर पुनर्गठन के तहत कुल 1 लाख नौकरियां कम हो सकती हैं. कंपनी का ये कदम ऑटो इंडस्ट्री में तेजी से बदल रहे माहौल को दिखाता है, जहां चीनी कंपनियों से बढ़ता कॉम्पिटिशन, मांग में कमी, टैरिफ और ज्यादा प्रोडक्शन क्षमता जैसी चुनौतियां बड़ी कार कंपनियों पर दबाव बढ़ा रही हैं.