NEET UG 2026 Result: सबसे कम रैंक पर कहां मिल सकता है MBBS? पिछले साल के ट्रेंड से समझिए पूरा गणित

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NEET UG 2026 Result: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के नीट यूजी रिजल्ट जारी करने के बाद अब सभी की नजरें मेडिकल कॉलेज में एडमिशन पर हैं. हालांकि, NEET क्वालीफाई करना और सरकारी कॉलेज में एमबीबीएस सीट हासिल करना दोनों अलग बातें हैं. देशभर में एमबीबीएस सीटों की संख्या सीमित है, जबकि एलिजिबल उम्मीदवारों की संख्या कई गुना ज्यादा है.

सीट मैट्रिक्स के अनुसार, देश में इस समय कुल 1,36,339 एमबीबीएस सीटें हैं. इनमें 63 हजार से ज्यादा सरकारी और 73 हजार से ज्यादा प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की सीटें हैं. इसका मतलब है कि लगभग हर 8 क्वालिफाइड उम्मीदवारों में से केवल एक को एमबीबीएस सीट मिल पाती है, जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए मुकाबला और भी ज्यादा कड़ा हो जाता है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि कम रैंक पर कहां एमबीबीएस सीट मिलने की संभावना रहती है और पिछले वर्षों के काउंसलिंग ट्रेड क्या कहते हैं. 

कम रैंक पर कहां मिल सकता है एमबीबीएस?

अगर आपकी रैंक टॉप सरकारी मेडिकल कॉलेज की कट ऑफ तक नहीं पहुंची है, तब भी उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं होती है. पिछले वर्षों की काउंसलिंग के आधार पर कई ऐसे सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, जहां कम रैंक पर भी एमबीबीएस सीटें अलॉट हुई है. इन कॉलेज में पंजाब का गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, महाराष्ट्र का गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज लातूर, हरियाणा का शहीद हसन खान मेवाती गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, छत्तीसगढ़ का लेट बलीराम कश्यप मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और उत्तर प्रदेश का गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज फिरोजाबाद भी शामिल है, जहां कम रैंक होने के बाद भी एमबीबीएस सीट मिलने का रिकॉर्ड रहा है. 

सरकारी कॉलेज में नहीं मिला तो ये भी ऑप्शन 

अगर सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट नहीं मिलती है, तो कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेज भी कम फीस में एमबीबीएस की सुविधा देते हैं. इनमें शादाना इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, एसआईएमएसआरसी बैंगलोर और बाबासाहेब अंबेडकर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल नई दिल्ली जैसे इंस्टीट्यूट का नाम शामिल है. हालांकि प्राइवेट कॉलेज की फीस अलग-अलग राज्य और इंस्टीट्यूट के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. 

सरकारी MBBS सीट के लिए कितना चाहिए स्कोर?

नीट यूजी 2026 में केवल क्वालीफाई कर लेना मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की गारंटी नहीं देता. इसके लिए उम्मीदवार की ऑल इंडिया रैंक, कैटेगरी, काउंसलिंग राउंड, सीटों की उपलब्धता और राज्य की आरक्षण नीति बड़ी भूमिका निभाती है. वर्तमान काउंसलिंग ट्रेंड के अनुसार जनरल वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 610 से ज्यादा अंक सरकारी एमबीबीएस सीट के लिए सुरक्षित माने जा रहे हैं. वहीं ओबीसी उम्मीदवारों के लिए 590 प्लस, ईडब्ल्यूएस के लिए 600 प्लस, एससी के लिए दो 550 प्लस और एसटी वर्ग के लिए 490 प्लस अंक बेहतर स्थिति में माने जा रहे, हालांकि अंतिम कट ऑफ काउंसलिंग के बाद ही स्पष्ट होगी.

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AIIMS और टॉप मेडिकल कॉलेज के लिए कितना स्कोर जरूरी? 

देश के टॉप मेडिकल इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए कंपटीशन सबसे ज्यादा रहता है. पिछले वर्षों के ट्रेंड के आधार पर एम्स नई दिल्ली के लिए लगभग 690 से 705 या उससे ज्यादा अंक की जरूरत पड़ सकती है. वहीं दूसरे प्रमुख एम्स जैसे भोपाल, जोधपुर, ऋषिकेश और भुवनेश्वर के लिए करीब 660 से 680 अंक कंपटीशन माने जाते हैं. जेआईपीएमईआर पुडुचेरी और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज जैसे इंस्टीट्यूट में भी सामान्यत 670 से ज्यादा अंक वाले उम्मीदवारों की मजबूत स्थिति रहती है.

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