Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर संसद में गूंजे सवाल, सरकार ने समझाया फ्यूल पर टैक्स का गणित

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Government on Petrol-Diesel Rate: ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा किया गया. पिछले कई दिनों से पेट्रोल और डीजल के दामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. अब राज्यसभा में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री से ईंधन की कीमतें और कराधान को लेकर सवाल पूछा गया. सांसद चंद्रकांत दामोदर हंडोरे ने पूछा क्या सरकार ने पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों का घरेलू बजट और महंगाई पर प्रभाव आंका है?

मंत्रालय के राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने इस सवाल के जवाब में बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों का महंगाई पर प्रभाव थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में उनके भार (Weightage) के आधार पर आंका जाता है. जैसे…

  • पेट्रोल का भार: 1.73%
  • डीजल का भार: 4.03%

इसके अलावा संसद में मंत्रालय से सवाल पूछा गया कि पिछले पांच सालों में पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार की ओर से वसूले गए कर एवं उपकर (सेस) का विवरण क्या है? इस सवाल के जवाब में सुरेश गोपी ने बताया कि पेट्रोलियम क्षेत्र से केंद्र सरकार को प्राप्त कुल राजस्व (कर, उपकर, रॉयल्टी, सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क आदि) इस प्रकार रहा…

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पेट्रोलियम क्षेत्र से केंद्र सरकार को कुल राजस्व योगदान (कर, उपकर, रॉयल्टी आदि)

वित्तीय वर्ष

केंद्र सरकार को कुल योगदान (₹ करोड़ में)

2021-22 4,92,302.5
2022-23 4,28,067.1
2023-24 4,32,394.1
2024-25* 4,24,826.7
2025-26* 4,75,739.0

इनमें प्रमुख मदों में उत्पाद शुल्क (Excise Duty), कस्टम ड्यूटी, कच्चे तेल पर सेस, रॉयल्टी, IGST, CGST, कॉरपोरेट टैक्स, डिविडेंड और अन्य शुल्क शामिल हैं.

केवल उत्पाद शुल्क (Excise Duty):

वित्तीय वर्ष

केंद्र सरकार को कुल योगदान (₹ करोड़ में)

2021-22 4,92,302.5
2022-23 4,28,067.1
2023-24 4,32,394.1
2024-25* 4,24,826.7
2025-26* 4,75,739.0

इसके अलावा संसद में पूछा गया कि क्या सरकार करों का युक्तिकरण (Rationalisation) कर ईंधन की कीमतें कम करने की योजना बना रही है? अगर हां तो विवरण, अगर नहीं तो कारण क्या हैं?

इस जवाब में मंत्री ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बाजार आधारित (Market Determined) हैं और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अंतरराष्ट्रीय बाजार और अन्य कारकों को देखते हुए कीमत तय करती हैं. हालांकि, आवश्यकता पड़ने पर सरकार कर संरचना में हस्तक्षेप करती रही है.

सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम…

  • नवंबर 2021 और मई 2022 में केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क में पेट्रोल पर 13 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 16 रुपए प्रति लीटर की कटौती की, जिसका पूरा लाभ उपभोक्ताओं को दिया गया.
  • मार्च 2024 में तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमत 2 रुपए प्रति लीटर घटाई.
  • अप्रैल 2025 में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ाया, लेकिन इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया.
  • मार्च 2026 में पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई. उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10 प्रति लीटर उत्पाद शुल्क घटा दिया.

सरकार के अनुसार, इस कटौती से केंद्र सरकार के कर राजस्व पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा, लेकिन इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के प्रभाव से बचाना था.

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