- भारत के व्यापार, ईंधन मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
Crude Oil Price Hike: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें रफ्तार पकड़ रही हैं. क्रूड ऑयल की कीमतें फिर से 91 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं. होर्मुज (Strait of Hormuz) की दाेबारा हुई नाकेबंदी से पहले ही दुनिया की 20% ईंधन की सप्लाई बाधित है और अब यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल जहाजों की नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है. इससे लाल सागर वाला रूट भी डेंजर जोन में आ गया है.
हूतियों ने सऊदी अरब को क्यों बनाया निशाना?
हूती विद्रोही सीधे तौर पर ईरान समर्थित समूह हैं. अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग में जब अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से तेल और गैस के टैंकरों की आवाजाही रोक दी है, तो हूतियों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सबसे बड़े सहयोगी सऊदी अरब की घेराबंदी शुरू कर दी है. हूतियों ने ड्रोन और एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों के दम पर लाल सागर के मुहाने (Bab al-Mandab) से गुजरने वाले सऊदी अरब के सभी ‘अरामको’ तेल टैंकरों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है.
इसका क्या होगा असर?
जिस तरह से होर्मुज से दुनियाभर के लिए 20% एनर्जी की सप्लाई होती है. ठीक उसी तरह से दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 12% से 15% और वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 10% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में अगर हूतियों के हमलों के डर से शिपिंग कंपनियां अगर लाल सागर वाले रूट को छोड़कर पूरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाते हुए ‘केप ऑफ गुड होप’ के रास्ते को चुनते हैं, तो इससे सफर में 14 से 30 दिन का समय और बढ़ जाएगा. रास्ता लंबा होगा, तो ईंधन पर खर्च भी बढ़ेगा. ऐसे में जहाजों का समुद्री बीमा प्रीमियम भी बढ़ेगा.
भारत पर संकट
भारत रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल मंगाता है, जो काला सागर और स्वेज नहर से होते हुए लाल सागर के रास्ते ही भारत आता है. बहरहाल, हूतियों ने रूसी जहाजों पर हमले की बात नहीं कही है, लेकिन इस पूरे इलाके में तनाव होने का कुछ तो असर पड़ेगा ही.
भारत के लिए एक और मुसीबत की बात यह है कि भारत से कपड़ा, चाय, बासमती चावल, इंजीनियरिंग गुड्स लाल सागर और स्वेज नहर के रास्ते यूरोप और अमेरिका में जाते हैं. रूट बदलने से भारतीय निर्यातकों की भी लागत बढ़ जाएगी. ऐसे में विदेशी बाजारों में भारतीय सामान महंगे और कम प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे.
क्या पेट्रोल-डीजल के बढ़ेंगे दाम?
अगर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 91 डॉलर या उससे ज्यादा के स्तर पर बनी रहती है, तो अगले महीने के पहले हफ्ते से ही भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में असर दिखने की उम्मीद की जा सकती है. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3-5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, इस बारे में अभी आधिकारिक तौर पर कुछ कहा नहीं गया है.
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