पाकिस्तान ने अमेरिका से मांग लिए 96000 करोड़ रुपये, आखिर एकाएक क्यों पड़ गई इतने पैसों की जरूरत?

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Pakistan 10 Billion Dollar Help: पैसों के लिए दर-दर भटक रहे पाकिस्तान ने अब अमेरिका के सामने हाथ फैलाए हैं. पाकिस्तान ने अमेरिका से पूरे 10 अरब डॉलर (लगभग 96000 करोड़) रुपये मांगे हैं. इन पैसों का इस्तेमाल पाकिस्तान अपनी इकोनॉमी को मजबूत बनाने में करना चाहता है. पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अब उसने अमेरिका से यह मदद एक ऐसे समय में मांगी है, जब उस पर इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) का बेलआउट प्रोग्राम पहले से चल रहा है. 

कर्ज के भरोसे जैसे-जैसे चल रही इकोनॉमी

साल 2023 में पाकिस्तान डिफॉल्ट होने की कगार पर था, तब उसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिले 3 अरब डॉलर के आपाकालीन पैकेज ने बचा लिया. इसके बाद पाकिस्तान ने IMF से फिर 7 अरब डॉलर का एक और बड़ा लोन लिया. हालांकि, IMF से लोन मिलने की शर्त ही यह थी कि पाकिस्तान को इसके बदले जनता की कमाई पर सरकार द्वारा वसूले जाने वाले टैक्स को बढ़ाना होगा. इससे देश में महंगाई चरम पर पहुंच गई. 

पाकिस्तान के साथ एक और बड़ी दिक्कत यह भी है कि उसका विदेशी मुद्रा भंडार भी चीन और सऊदी अरब जैसे मित्र देशों से लिए गए उधार के भरोसे है. इस स्थिति में अगर अमेरिका से 10 अरब डॉलर की एक्सचेंज स्टेबलाइज़ेशन सुविधा (मुद्रा विनिमय स्थिरता सुविधा) मिल जाती है, तो पाकिस्तान को बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी. 

पाकिस्तान का नया दांव

पाकिस्तान का यह अनुरोध हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष के दौरान दोनों देशों की आपस में बातचीत कराने की उसकी भूमिका के बाद आया. अमेरिका-ईरान में मध्यस्थता से पाकिस्तान की डिप्लोमैटिक स्थिति मजबूत हुई और ऐसी उम्मीदें जगीं कि वह अब अमेरिका से और मजूबूत आर्थिक मदद मांग सकता है. शायद यही वजह रही होगी कि पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने वॉशिंगटन में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट से मुलाकात कर उनसे 10 अरब डॉलर की द्विपक्षीय विनिमय स्थिरता सहायता सुविधा मांगी.

यह सामान्य लोन से अलग क्यों? 

यह कोई पारंपरिक लोन या उधार नहीं है, बल्कि यह एक तरह का करेंसी स्वैप है. इसके तहत, अमेरिकी ट्रेजरी पाकिस्तान को कोई फंड दान या भीख में नहीं देता, बल्कि वह अमेरिकी डॉलर के बदले पाकिस्तान रुपये का एक अस्थायी विनिमय (Swap) होता है. इससे पता चलता है कि देश के पास डॉलर की शॉर्ट टर्म गारंटी है. इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है और देश में विदेशी निवेश की दोबारा शुरुआत होती है. इससे पाकिस्तान को IMF के कड़े शर्तों का सामना भी नहीं करना पड़ता. 

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