NEET 2026 Success Story: पेंटिंग कर परिवार चलाया, अब NEET में 583 अंक लाकर बूंदी के बेटे ने MBBS की सीट की पक्की

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NEET 2026 Success Story: राजस्थान के बूंदी जिले के रहने वाले सूरज सैनी ने साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों के सामने आर्थिक मुश्किलें भी छोटी पड़ जाती है. परिवार की मदद के लिए गांव-गांव जाकर घरों की पेंटिंग करने वाले सूरज ने इस साल नीट यूजी 2026 में 583 अंक हासिल किए. इस स्कोर के साथ उन्हें मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट मिलने की उम्मीद है. खास बात यह है कि 12वीं कक्षा तक उन्हें नीट परीक्षा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. धीरे-धीरे जानकारी मिली, तैयारी शुरू की और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने मेडिकल कॉलेज तक का सफर तय कर लिया. 

12वीं तक नहीं पता था नीट क्या होता है?

सूरज बूंदी जिले के कापरेन स्थित एक हिंदी मीडियम सरकारी स्कूल के छात्र रहे हैं. उन्होंने दसवीं में 87 प्रतिशत और 12वीं में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए.  सूरज बताते हैं कि स्कूल के दौरान उनका पूरा ध्यान केवल बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने पर था. उन्हें नीट परीक्षा के बारे में पहली बार उनकी बुआ से पता चला, इसके बाद उन्होंने फरवरी 2024 में आवेदन किया और पहली बार परीक्षा दी. सूरज के अनुसार पहले प्रयास में उनकी तैयारी बहुत सीमित थी, परीक्षा देने के बाद उन्हें लगा कि प्रश्न पत्र अपेक्षा से ज्यादा आसान था.  उन्हें एहसास हुआ की समस्या पेपर नहीं, बल्कि उनकी तैयारी में थी. इस वजह से उन्होंने दोबारा पूरी गंभीरता के साथ पूरी तैयारी शुरू की. 

घर पर पढ़ाई से कोटा तक का सफर 

पहले प्रयास के बाद सूरज ने घर पर रहकर पढ़ाई जारी रखी. बाद में उन्हें कोटा स्थित कोचिंग के कार्यक्रम के तहत फ्री कोचिंग और रहने की सुविधा मिली. कोटा पहुंचने के बाद उन्हें प्रतियोगी परीक्षा की सही रणनीति समझ आई. शुरुआत में उन्हें लगा कि दूसरे छात्र उनसे काफी आगे हैं, क्योंकि वह कई वर्षों से तैयारी कर रहे थे. लेकिन शिक्षकों के मार्गदर्शन से उन्हें धीरे-धीरे अपनी तैयारी भी मजबूत कर ली. सूरज का कहना है कि नीट की तैयारी के लिए केवल कोचिंग ही जरूरी नहीं होती, बल्कि सही दिशा मिलना ज्यादा जरूरी होता है. उनके अनुसार शिक्षक यह समझाने में मदद करते हैं कि क्या पढ़ना है, कितना पढ़ना है और किस तरह तैयारी को आगे बढ़ाना है. 

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पढ़ाई के साथ-साथ करते थे घरों की पेंटिंग 

कोटा जाने से पहले सूरज छुट्टियों और खाली समय में आसपास के गांव में घरों की पेंटिंग का काम करते थे. इससे होने वाली कमाई से वह परिवार की आर्थिक मदद करते थे. सूरज ने बताया कि यह काम उसने किसी से सीखा नहीं था, बल्कि लोगों को काम करते देखकर खुद सीख लिया. धीरे-धीरे यही काम परिवार की एक्स्ट्रा आय का साधन बन गया. वहीं सूरज की मां घीसी बाई खेतों में मजदूरी करती है, आर्थिक तंगी की वजह से उसकी छोटी बहन गरिमा को आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने पढ़ी और वह अपनी मां के साथ खेतों में काम करने लगी. सूरज अब सूरज चाहते हैं कि उनकी बहन दोबारा स्कूल जाए.

अब सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की तैयारी 

नीट यूजी 2026 में 583 अंक हासिल करने के बाद सूरज का अगला टारगेट मेडिकल काउंसलिंग है. उन्हें भरोसा है कि इस स्कोर के आधार पर सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट मिल जाएगी. वहीं अपने अनुभव के आधार पर सूरज का कहना है कि जो छात्र डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, उन्हें 11वीं से ही नीट की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. उनका मानना है कि समय रहते तैयारी शुरू करने के बाद में अतिरिक्त दबाव नहीं बनता. 

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