सोना अब सिर्फ गहनों की जरूरत नहीं, बल्कि मुश्किल समय में पैसों का सहारा भी बन रहा है. सोने के बदले कर्ज लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है. इसका सबसे ज्यादा फायदा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी NBFCs को मिला है. RBI के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में NBFCs का गोल्ड लोन एक साल में 68.5% बढ़ गया, जबकि जुलाई 2025 में इसकी ग्रोथ 43.9% थी. वहीं, बैंकों के गोल्ड लोन की रफ्तार 136.4% से घटकर 88.1% रह गई.
जुलाई के आखिर तक NBFCs के पास सोने के गहनों के बदले दिए गए करीब 3.54 लाख करोड़ रुपये के कर्ज थे. बैंकों का गोल्ड लोन करीब 5.52 लाख करोड़ रुपये रहा. NBFCs के रिटेल लोन में गोल्ड लोन सबसे तेजी से बढ़ने वाला हिस्सा रहा. इससे साफ है कि सोने के बदले जल्दी कर्ज लेने की मांग बढ़ी है.
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NBFCs का कुल कर्ज भी ज्यादा हुआ
जुलाई में NBFCs का कुल कर्ज 14.9% ज्यादा होकर 59.89 लाख करोड़ रुपये हो गया. एक साल पहले इसकी ग्रोथ 10.6% थी. लेकिन, बैंकों के कुल कर्ज में 19.1% का इजाफा हुआ. NBFCs के रिटेल लोन में भी तेजी आई और इसकी ग्रोथ जुलाई में 21.4% रही, जो एक साल पहले 13.7% थी.
रिटेल लोन में हाउसिंग लोन 11.9% ज्यादा होकर 8.55 लाख करोड़ रुपये हो गया. गाड़ी के लोन की ग्रोथ 15.1% रही. वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के लिए दिए गए कर्ज में 51.5% की इजाफा दर्ज की गई.
इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर की रफ्तार घटी
दूसरी तरफ, इंडस्ट्री को दिए जाने वाले कर्ज की ग्रोथ 9.3% से घटकर 7.4% रह गई. इंफ्रास्ट्रक्चर लोन का इजाफा भी 8.1% से कम होकर 6.2% हो गई. पावर सेक्टर में कर्ज की ग्रोथ 12.3% से घटकर 6.9% रही.
सर्विस सेक्टर के कर्ज की ग्रोथ भी 24.5% से घटकर 15.2% रह गई. लेकिन, कमर्शियल रियल एस्टेट को दिए कर्ज में 22.3% की मजबूत बढ़ोतरी हुई. वहीं, ट्रेड से जुड़े कर्ज की ग्रोथ 14.7% और ट्रांसपोर्ट से जुड़े कर्ज की ग्रोथ 10.7% रही.
कृषि कर्ज में भी जोरदार इजाफा
कृषि और उससे जुड़ी कामों के लिए कर्ज में अच्छी तेजी आई. जुलाई में इसकी ग्रोथ 18% रही, जबकि एक साल पहले ये सिर्फ 5.4% थी. इस सेक्टर पर कुल बकाया कर्ज 80,271 करोड़ रुपये रहा.
कुल मिलाकर, NBFCs में रिटेल लोन की मांग बढ़ी है और इसमें गोल्ड लोन सबसे तेजी से बढ़ रहा है. जुलाई में कुल रिटेल लोन 26.06 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि एक साल पहले ये 21.46 लाख करोड़ रुपये था.
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