RBI के सिस्टम में अचानक आई तकनीकी खराबी, आनन-फानन में उठाया बड़ा कदम

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भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने सोमवार को बैंकों से अतिरिक्त नकदी अपने पास लेने के लिए 5 लाख करोड़ रुपये का एक दिन का वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑपरेशन करने का ऐलान किया. दरअसल, RBI ने पहले 30 दिनों के लिए 5 लाख करोड़ रुपये की नीलामी की थी, लेकिन इसमें बैंकों की तरफ से सिर्फ 2.59 लाख करोड़ रुपये की ही बोली मिली.

प्लेटफॉर्म पर आई तकनीकी खराबी
इस नीलामी के समय कुछ तकनीकी खराबी आ जाने के कारण इसे अचानक से रोकना पड़ा. एक सरकारी बैंक के ट्रेडर के मुताबिक, इस नीलामी के दौरान RBI के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म में तकनीकी दिक्कत आ गई थी. इसके चलते बोली लगाने का प्लेटफॉर्म बदल दिया गया. कई बैंक इस बदलाव के लिए तैयार नहीं थे जिसकी वजह से वो नीलामी में हिस्सा नहीं ले पाए. 

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इसी वजह से RBI ने अब एक दिन के लिए 5 लाख करोड़ रुपये का VRRR ऑपरेशन करने का फैसला किया है. इसका मकसद बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को RBI के पास वापस लेना है.

RBI ने लिया फैसला
लॉन्ग-टर्म ऑक्शन में बैंकों की कम भागीदारी की वजह से सिस्टम में भारी लिक्विडिटी बची रह गई. इस स्थिति को तुरंत नियंत्रित करने के लिए RBI ने देर ना करते हुए 5 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ओवरनाइट VRRR ऑक्शन घोषित कर दिया, जिससे बैंक अपनी अतिरिक्त पूंजी को केंद्रीय बैंक के पास सुरक्षित रख सकें और मनी मार्केट की ब्याज दरें स्थिर बनी रहें.

5 लाख करोड़ रुपये का यो ओवरनाइट ऑपरेशन ऐसे समय में हो रहा है जब सेंट्रल बैंक लिक्विडिटी की स्थिति को बेहतर बनाना चाहता है और ये निश्चित करना चाहता है कि शॉर्ट-टर्म मनी-मार्केट रेट्स उसकी मॉनेटरी पॉलिसी के रुख के मुताबिक बने रहें.

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क्या है VRRR ऑक्शन?
बता दें कि VRRR ऑक्शन, बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी को मैनेज करने के लिए RBI के टूल्स में से एक है. इस ऑपरेशन के तहत, बैंक एक तय समय के लिए अपना अतिरिक्त फंड सेंट्रल बैंक के पास रखते हैं, जिससे RBI को अतिरिक्त लिक्विडिटी को सोखने में मदद मिलती है.

इस ऑक्शन के दौरान आई तकनीकी रुकावट RBI के इलेक्ट्रॉनिक नीलामी इंफ्रास्ट्रक्चर की अहमियत को भी उजागर करती है, जिसका इस्तेमाल बैंक लिक्विडिटी-मैनेजमेंट ऑपरेशन्स में हिस्सा लेने के लिए नियमित रूप से करते हैं.



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