ईरान में ज्यादा पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले लोगों की जेब पर बड़ा भारी असर पड़ने वाला है. सरकार ने तय सीमा से ज्यादा पेट्रोल खरीदने वालों के लिए पेट्रोल की कीमत दोगुनी कर दी है. ये फैसला भी ऐसे समय में लिया गया है, जब ईरान में महंगाई काफी ज्यादा है. ईरान में काफी समय से सबसे सस्ते पेट्रोल मिलता है. लेकिन लगातार बढ़ती खपत और देश की आर्थिक परेशानियों के बीच सरकार ने ज्यादा पेट्रोल इस्तेमाल करने वालों से ज्यादा कीमत वसूलने का फैसला किया है.
कितना महंगा हुआ पेट्रोल?
नई व्यवस्था के तहत एक आदमी को हर महीने 110 लीटर तक पेट्रोल ही फिक्स कीमत पर मिलेगा, लेकिन अगर कोई व्यक्ति इससे ज्यादा पेट्रोल खरीदता है तो उसे अब ज्यादा कीमत देनी होगी. यानी 110 लीटर की सीमा पार करने पर पेट्रोल की कीमत बढ़ाकर 1 लाख ईरानी रियाल प्रति लीटर कर दी गई है. ये रकम लागू कीमत से दोगुनी है. हालांकि, इस फैसले का असर सभी पेट्रोल इस्तेमाल करने वालों पर नहीं पड़ने वाला है. ईरान की सरकारी तेल वितरण कंपनी के अनुसार, नई कीमत का असर करीब 15 प्रतिशत लोगों पर ही प्रभाव पड़ने की संभावना है.
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कितनी हो रही पेट्रोल की खपत?
ईरान में पेट्रोल की खपत लगातार बढ़ रही है. अगस्त में देश में पेट्रोल की रोजाना खपत करीब 14.5 करोड़ लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. वहीं, दूसरी तरफ, देश में रोज करीब 12.2 करोड़ लीटर पेट्रोल ही तैयार हो रहा है. यानी खपत और उत्पादन के बीच बड़ा अंतर है. इस कमी को पूरा करने के लिए ईरान को दूसरे देशों से पेट्रोल खरीदना पड़ता है.
पेट्रोल महंगा हुआ तो क्या होगा?
ईंधन की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ गाड़ी चलाने वालों पर ही नहीं पड़ेगा. पेट्रोल महंगा होने पर माल ढुलाई और ट्रैवल का खर्च बढ़ सकता है. इसका असर दूसरी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
ईरान पहले से ही बहुत ज्यादा महंगाई से परेशान है. ऐसे में पेट्रोल की कीमत बढ़ने से आम लोगों के रोजमर्रा के खर्च पर ज्यादा दबाव पड़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है.
सरकार ने क्यों लिया फैसला?
ईरान सरकार का कहना है कि पेट्रोल की बढ़ी कीमत से मिलने वाली एक्स्ट्रा पैसों का इस्तेमाल लोगों तक आर्थिक मदद पहुंचाने में किया जाएगा. सरकार के सामने पेट्रोल की बढ़ती खपत को कंट्रोल करने के साथ-साथ देश पर बढ़ रहे आर्थिक दबाव को कम करने की चुनौती है. ईरान की मुद्रा कमजोर होने और महंगाई बढ़ने के बीच पेट्रोल की कीमत बढ़ाने का फैसला सरकार के लिए आसान नहीं था.
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