क्रिकेट को जानने में समझने वाले लोग ललिद मोदी (Lalit Modi) के नाम से जरूर वाकिफ होंगे. आईपीएल की शुरुआत ललित मोदी ने ही की थी. वह आईपीएल के संस्थापक और पहले चेयरमैन रहे, लेकिन बीते कई सालों से वह विदेश में रह रहे हैं. सोशल मीडिया पर अक्सर उनको लेकर चर्चा होती रहती है. लोग उन्हें ‘भगोड़ा’ भी कहते थे, लेकिन अब आईपीएल के संस्थापक को 16 साल के लंबे इंतजार के बाद कानूनी राहत मिली.
इसके बाद उन्होंने खुद भारत वापस आने की बात की. लेकिन एक सवाल यह है कि आखिर आईपीएल जैसी लीग का ईजाद करने वाले ललित मोदी भारत से बाहर क्यों रह रहे थे? उन पर क्या आरोप लगे? लोग उन्हें भगोड़ा क्यों कहते हैं? आइए आसान भाषा में समझते हैं कि उनको लेकर पूरा माजरा क्या है.
ललित मोदी पर क्या थे आरोप?
दरअसल आईपीएल का दूसरा सीजन (IPL 2009) दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में खेला गया था. उन पर आरोप लगे कि उन्होंने अपने निजी फायदे के लिए आईपीएल को भारत की जगह दक्षिण अफ्रीका में करवाया था. लेकिन उनका कहना था कि लोकसभा चुनाव की वजह से टूर्नामेंट को भारत में करवाना संभव नहीं था.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया था कि करीब 250 करोड़ की रकम भारतीय रिजर्व बैंक की इजाजत के बगैर विदेश भेजी गई थी. ईडी ने यूके में स्थित कंपनियों से पैसे लेने और विदेशी मुद्रा में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे. 2018 में ललित मोदी पर 10.65 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था. इसके जवाब में ललित मोदी का कहना था कि फैसले सामूहिक रूप से लिए गए थे. उन्होंने निजी कोई लेन-देन नहीं किया था.
अपीलीय ट्रिब्यूनल ने रद्द किए जुर्माने
अपीलीय ट्रिब्यून विशेष अर्ध-न्यायिक संस्था है, जिसने प्रवर्तन निदेशालय के ज्यादातर जुर्मानों को रद्द कर दिया है. इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वो 16 साल से जिस सच का इंतजार कर रहे थे, आखिरकार उस पर अदालत की मोहर लग गई है.
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